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बूस्टिंग स्टेशन की सप्लाई चालू छोड़कर पानी चोरी रोकने गामड़ी क्षेत्र चला गया की-मैन, डेढ़ घंटे तक ओवरफ्लो होकर टैंकों से बहता रह

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अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी।
शहर के करीब 50 फीसदी वार्ड नहरी पानी की किल्लत से इस समय पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों में आपसी तालमेल की कमी के कारण शुक्रवार रात डेढ़ घंटे से अधिक समय तक पानी व्यर्थ बहता रहा। पानी की बर्बादी का यह मामला सिविल अस्पताल के बूस्टिंग स्टेशन का है। शुक्रवार रात बूस्टिंग स्टेशन के टैंकों की सप्लाई चालू कर की-मैन गामड़ी क्षेत्र में पानी चोरी रोकने चला गया और यहां टैंकों से पानी ओवरफ्लो होकर सिविल अस्पताल परिसर में जमा होता गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस लापरवाही से लाखों लीटर से अधिक पानी की बर्बादी हुई है। वहीं, विभागीय अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लेते हुए की-मैन को चेतावनी भी दी है।
जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल के बूस्टिंग स्टेशन पर शुक्रवार की रात की-मैन कुलदीप की ड्यूटी थी। यहां के टैंकों की क्षमता करीब आठ लाख लीटर पानी की है और खाली टैंकों को भरने में तीन से चार घंटे का समय लगता है। रात करीब आठ बजे की-मैन ने टैंकों को भरने के लिए मोटर चलाई और इसके करीब साढ़े तीन घंटे बाद तक टैंकों की संभाल नहीं की गई। करीब एक से डेढ़ घंटे में ही बूस्टिंग स्टेशन के टैंक पानी से लबालब हो गए और इनसे पानी ओवरफ्लो होने लग गया। यह पानी ओवरफ्लो होकर सिविल अस्पताल परिसर में जमा हो गया। इसी दौरान एक शख्स ने पेयजल बर्बादी होते देख इसकी सूचना की-मैन कुलदीप को दी। रात करीब साढ़े 11 बजे बूस्टिंग स्टेशन पर पहुंचकर की-मैन ने मोटरों को बंद किया।
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वहीं, की-मैन कुलदीप ने बताया कि बूस्टिंग स्टेशन के लिए पेयजल सप्लाई छोड़ने के बाद गामड़ी क्षेत्र में लोग वॉल को खोलकर पानी की चोरी करते हैं। इसलिए वह मोटरें चालू करके वहां वॉल संभालने चला गया था। कुलदीप ने बताया कि बूस्टिंग स्टेशन से नियमित पेयजल आपूर्ति की जाती है, लेकिन शुक्रवार को टैंकों में पानी होने के बावजूद पेयजल सप्लाई नहीं की गई। कुलदीप ने बताया कि टैंकों में पहले से पानी है, उसे इसकी जानकारी अधिकारियों या कर्मचारियों ने नहीं दी थी। उसने तो खाली टैंक समझकर दोनों मोटरें चालू की थी। उसे नहीं पता था कि टैंकों में पानी है और कुछ देर में ही ये ओवरफ्लो कर जाएंगे।
टैंकों में आता है आठ लीटर पानी
विभागीय कर्मचारी ने बताया कि अमूमन तीन से चार घंटे में ही बूस्टिंग स्टेशन के वाटर स्टोरेज टैंक पानी से लबालब हो जाते हैं। इतना ही नहीं बूस्टिंग स्टेशन के दोनों टैंकों को प्रतिदिन भरा जाता है और यहां से सात से आठ लाख लीटर पानी की आपूर्ति सिविल अस्पताल सहित वार्ड-17 और 18 में की जाती है।

अस्पताल में पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर भरा पानी
बूस्टिंग स्टेशन सिविल अस्पताल परिसर के अंदर है। शुक्रवार रात टैंकों का पानी ओवरफ्लो होकर पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर जमा हो गया। गनीमत रही कि शनिवार दोपहर तक कोई पोस्टमार्टम केस सिविल अस्पताल नहीं आया, वरना लोगों के साथ-साथ चिकित्सकों को भी परेशानी झेलनी पड़ती।
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बोले एसडीओ
फिलहाल नहरी पानी की कमी के चलते शहर में पेयजल सप्लाई एक दिन छोड़कर एक दिन की जा रही है। बूस्टिंग स्टेशन पर करीब डेढ़ घंटे तक पेयजल बर्बादी का मामला मेरे संज्ञान में आया है। की-मैन की लापरवाही से ही पेयजल की बर्बादी हुई है और इस संबंध में मैंने उसे बुलाकर चेतावनी दी गई है।
- मनदीप कुमार, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग।
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