अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
मैं झज्जर हूं। वैसे तो मैंने अपने जीवन के 21 बसंत पूरे कर लिए हैं लेकिन मेरी स्थापना छज्जू नाम के एक जाट ने की थी। पहले मेरा नाम ‘छज्जू नगर’ था लेकिन बाद में झज्जर हो गया। हरियाणा के मानचित्र में जिले के तौर पर तो मैं 15 जुलाई 1997 को अस्तित्व में आया। दिल्ली से मैं लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर हूं। मेरे दो मुख्य शहर बहादुरगढ़ और बेरी है। बहादुरगढ़ की स्थापना राठी जाटों ने की थी। पहले बहादुरगढ़ को सर्राफाबाद के नाम से जाना जाता था। पिछले दिनों बहादुरगढ़ का तेजी से औद्योगिकरण हुआ है। बेरी इसका दूसरा मुख्य शहर है। यहां भीमेश्वरी देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में पूजा करने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु प्रतिवर्ष आते हैं। मंदिरों के अलावा यहां पर्यटक भिंडावास पक्षी अभ्यारण घूमने भी जाते हैं।
पर्यटन में मेरी ये हैं पहचान
1. भिंडावास पक्षी अभ्यारण
भिंडावास पक्षी अभ्यारण झज्जर से 15 किमी की दूरी पर है। दिल्ली से भी पर्यटक मात्र तीन घंटे में आसानी से अभ्यारण तक पहुंच सकते हैं। इस अभ्यारण में 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों को देखा जा सकता है। इन पक्षियों में स्थानीय और प्रवासी दोनों शामिल हैं। यहां पर एक झील का भी निर्माण किया गया है। यह झील बहुत सुंदर है। पर्यटक इस झील के किनारे सैर का आनंद ले सकते हैं और इसके खूबसूरत दृश्यों को कैमरे में कैद भी कर सकते हैं। यह अभ्यारण लगभग 1074 एकड़ में फैला हुआ है।
2. भीमेश्वरी देवी मंदिर
झज्जर के बेरी गांव में श्रद्धालु भीमेश्वरी देवी मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। यह मंदिर महाभारत काल का है। नवरात्रों में यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर के प्रति बड़ी श्रद्धा है। इनके अलावा देश-विदेश से भी श्रद्धालु इस मंदिर में पूजा करने के लिए आते हैं।
3. बुआ का गुंबद
झज्जर में स्थित बुआ का गुंबद बहुत खूबसूरत है। इसका निर्माण मुस्तफा कलोल की बेटी बुआ ने कराया था। उन्होंने इसका निर्माण अपने प्रेमी की याद में कराया था। गुंबद के पास ही एक तालाब का निर्माण भी किया गया है। वह दोनों इसी तालाब के पास मिलते थे।
4. संग्रहालय
पर्यटक झज्जर में संग्रहालय देख सकते हैं। यह हरियाणा का सबसे बड़ा संग्रहालय है। इसका निर्माण 1959 ई. में किया गया था। संग्रहालय के निर्देशक स्वामी ओमानंद सरस्वती ने पूरे विश्व से वस्तुएं एकत्र करके संग्रहित की हैं। उन्हीं के कठिन परिश्रम के फलस्वरूप पर्यटक यहां पर रोमन, यूनानी, गुप्त, पाल, चोल, गुजर, प्रतिहार, चौहान, खिलजी, तुगलक, लेड़ही और बहमनी वंश के सिक्के व कलाकृतियां देख सकते हैं। इसके अलावा यहां पर नेपाल, भूटान, श्रीलंका, चीन, पाकिस्तान, जापान, थाईलैंड, बर्मा, रूस, कनाडा, आस्ट्रेलिया, फ्रांस और इंग्लैंड आदि देशों की मुद्राएं भी देखी जा सकती हैं।
नेशनल स्तर की महत्वपूर्ण योजनाएं
2003 : केएमपी के 45 किलोमीटर हिस्सा का निर्माण शुरू।
2010 : जसौर खेड़ी गांव में 400 एकड़ जमीन पर देश का छठा ग्लोबल सेंटर फॉर न्यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप का निर्माण।
2011 : इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पॉवर प्लांट का झाड़ली गांव में 1500 मेगावाट का प्लांट चालू।
2012 : बाढसा गांव में 300 एकड़ जमीन पर एम्स व नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट का निर्माण शुरू।
2013 : दिल्ली मेट्रो का बहादुरगढ़ प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू।
मेरी पृष्ठभूमि
फैलाव - 1983.90 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर - 80.65 प्रतिशत
यूनिवर्सिटी - पीडीएम और जगन्नाथ
कॉलेज - 11
एम्स - एक
विस क्षेत्र - चार
लोकसभा - रोहतक
जिले की आबादी - 9,58,405
झज्जर शहर की आबादी - 50 हजार
अस्पताल - 50
मुख्य व्यवसाय - खेती, उद्योग।
कलोई में देश का पहला नवादेय स्कूल
खेल और सिनेमा जगत के सितारे
वीरेंद्र गूंगा, बजरंग पूनिया, सुनील डबास, सोनू मांडोठी, प्रदीप, अनूप, नाड़ पहलवान कुश्ती व कबड्डी में झज्जर का नाम चमका चुके हैं तो दुजाना गांव निवासी दीपक कपूर सुलतान फिल्म में अभिनय कर झज्जर का मान बढ़ा चुके हैं।
हर कैबिनेट में रहा मंत्री तो मिला जिले को फायदा
जब से झज्जर जिला अस्तित्व में आया है, तब से हर कैबिनेट में झज्जर से कोई न कोई मंत्री रहा है। 1997 में बंसीलाल सरकार ने झज्जर को अलग जिला घोषित किया तो उनकी कैबिनेट में कांता देवी, चौटाला सरकार में स्व. धीरपाल गुलिया, हुड्डा सरकार में रघुबीर सिंह कादियान, हुड्डा सरकार के दूसरे टर्म में गीता भुक्कल व वर्तमान में भाजपा सरकार के दौरान ओपी धनखड़ कृषि व पंचायत मंत्री का दायित्व संभाले हुए हैं। हर सरकार में यहां का मंत्री होने के कारण क्षेत्र के विकास को काफी बढ़ावा मिला है।
सैनिकों ने बढ़ाया कारगिल युद्ध में झज्जर का मान
कारगिल संघर्ष में भारत को जीत दिलाने में बहादुरगढ़ और झज्जर के सैनिकों का योगदान यादगार रहा है। बहादुरगढ़ के गांव देसलपुर के जयप्रकाश, जाखोदा के मेजर आजाद सिंह, नीलोठी के सिपाही श्याम सिंह, सोलधा के नायक रामफल, बराही के कैप्टन अमित वर्मा और गांव खुंगाई के हलवदार हरिओम धारीवाल कारगिल संघर्ष में अपने देश की रक्षा के लिए शहीद हुए। झज्जर के गांव सुबाना के सुरेंद्र सिंह, जैतपुर के विनोद कुमार, जटवाड़ा के लीलाराम, झांसवा के राजेश और गांव ढाकला के धर्मवीर भी दुश्मन के दांत खट्टे कर बलिदान देने वालों में शामिल थे।
खुंगाई निवासी हरिओम ने शत्रु के आठ सैनिक किए थे ढेर
गांव खुंगाई के निवासी व जाट रेजिमेंट की 17वीं बटालियन के हवलदार हरिओम 7 जुलाई 1999 को मशकोह घाटी में दुश्मन से लोहा ले रहे थे। बहादुरी से मोर्चे को संभालते हुए उन्होंने शत्रु के आठ सैनिकों को मार गिराया। इसके बाद वो लड़ते हुए दुश्मन के मोर्चे पर टूट पड़े। इस दौरान वो दुश्मन के गोले की चपेट में आकर शहीद हो गए। लेकिन तब तक अपने मोर्चे पर वो देश की जीत को आसान बना चुके थे।
टाइगर हिल के टाइगर
गांव सोलधा के नायक रामफल भी 6 जुलाई 1999 को कारगिल की टाइगर हिल पर दुश्मन के छक्के छुड़ाने वालों में शामिल थे। रामफल और उनके साथियों ने दुश्मन के 11 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद दुश्मन से लोहा लेते हुए वो ग्रेनेड से घायल हो गए और शहादत को प्राप्त हुए। नायक रामफल के परिवार में उनकी पत्नी अनीता, भाई रामकुमार, बेटे संदीप व रवि और बेटी सुमन हैं। रामफल के बच्चे आज भी अपने पिता के कार्यों से प्रेरणा लेते हैं। नायक रामफल श्रीलंका में रही शांति सेना में भी शामिल हुए थे। इसके लिए उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था।
कारगिल युद्ध में इन्होंने दी थी शहादत
नाम गांव
हवलदार हरिओम खुंगाई
सिपाही धर्मवीर ढाकला
ग्रेनेडियर सुरेंद्र सुबाना
लांस नायक झांसवा
सिग्नल मैन विनोद जैतपुर
लांस नायक नीलोठी
असि. कमांडेट आजाद जाखोदा
हवलदार जयप्रकाश देशलपुर
नायक लालाराम जटवाड़ा
कैप्टन अमित बराही
नायक रामफल सोलधा
ये हैं चुनौतियां
लावारिस पशु
मेरे बड़े होने पर कुछ समस्याएं भी बड़ी हो गई। हजारों की संख्या में लावारिस यहां पर घूम रहे है। वैसे तो यहां पर 12 गोशालाएं हैं लेकिन ये इन पशुओं के लिए नाकाफी हैं। बजट और फंड के अभाव में इन गोशालाओं में भी पशुओं की हालत कुछ ठीक नहीं हैं। लावारिस पशु आए दिन हादसे का कारण बन रहे हैं। एक बड़ा से आंगन यानि गो अभ्यारण बने तो इनको आश्रय मिल सकता है।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
चारों ओर फैल रही गंदगी में मुझे चिढ़ा रही है। इस गंदगी के निपटान के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट जरूरी है। जिससे कचरे मेें फेंके गए सामान को सही तरीके से निपटाए जाए। अभी तक नपा खुले में कूूड़ा डालकर मेरे पर दाग लगा रही है।
पार्किंग और जाम
वाहनों के बढ़ने के कारण अब पार्किंग समस्या गहराने लगी है। बेतरतीब वाहन पार्किंग व फुटपाथ पर दुुकानदारों के कब्जे ने जाम के हालात पैदा कर दिए हैं। शहर के मध्य कोई पार्किंग स्थल बने तो ही इस समस्या का समाधान निकल सकता है।
झज्जर के विकास के लिए पूरे प्रयास : धनखड़
कृषि मंत्री ओपी धनखड़ का कहना है कि झज्जर जिले के विकास के लिए पूरे प्रयास कर रहा हूं। यहां के किसानों की समृद्धि के लिए जलभराव वाली छह हजार एकड़ भूमि चिंहित की गई है। जिसे मछली पालन के लिए नई पॉलिसी बनाकर किसानों का फायदा किया जाएगा। तलाव में बड़ी फिश हैचरी लगाई जा रही है, जिसमें इजरायल से तकनीक सांझा की जाएगी। दूसरे समस्याओं को भी वे दूर करने के लिए प्रयासरत हैं।
पहले भी लाए बड़े प्रोजेक्ट : भुक्कल
झज्जर शहर से कांग्रेस विधायक व पूर्व मंत्री गीता भुक्कल के अनुसार झज्जर जिले के विकास में उनका बड़ा अहम योगदान रहा है। पूर्व में उनकी सरकार के दौरान वे एक्स, पॉवर प्लांट, मेट्रो, केएमपी निर्माण जैसे बड़े प्रौजेक्ट पर काम कर चुके हैं। अगर जनता ने मौका दिया तो झज्जर के विकास के लिए फिर भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगी।