बहादुरगढ़। अखिल भारतीय ब्राह्मण आरक्षण संघर्ष समिति ने राज्य सरकार पर फूट डालो, राज करो की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। समिति का कहना है कि जिस तरह अंग्रेजों ने भारतीयों को आपस में लड़ाया, उसी तरह आरक्षण के नाम पर यह सरकार राज्य में भाईचारे को समाप्त करने का प्रयास कर रही है।
शनिवार को जारी बयान में समिति के राष्ट्रीय महासचिव पं. भगवत स्वरूप गौतम ने कहा कि पूर्व सरकार ने 23 जनवरी 2013 को ब्राह्मण, बनिया, पंजाबी व राजपूत इन चार जातियों को आर्थिक आधार पर दस प्रतिशत आरक्षण देकर लागू कर दिया था। लेकिन वर्तमान सरकार ने आपस में लोगों का भाईचारा समाप्त करने के लिए 8 जून 2017 को अन्य छह सामान्य जातियों को भी उपरोक्त चार जातियों को दिए गए 10 प्रतिशत आरक्षण में शामिल कर दिया।
जबकि इन छह जातियों का आरक्षण संबंधित केस माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। जिसका अभी तक फैसला नहीं आया है। इसलिए फैसला आने से पूर्व इन चार जातियों के आरक्षण के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
उन्होंने कहा कि 19 जून को अखिल भारतीय ब्राह्मण आरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित हरिराम दीक्षित की अध्यक्षता में गोहाना में काफी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे और इस फैसले का कड़ा विरोध किया था। इसके विरोध में एसडीएम को एक ज्ञापन भी सौंपा था। इस विरोध को आगे बढ़ाने के लिए करनाल, पानीपत, कुरुक्षेत्र व हिसार में प्रदर्शन करने के लिए वहां आए हुए प्रतिनिधियों द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष की स्वीकृति लेकर तिथियां भी निर्धारित कर दी गई हैं।