झज्जर। गांव जैतपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन सोमवार को कथा सुनाते हुए आचार्य गौरव दीक्षित राधे राधे महाराज ने बताया कि जिसके जीवन में गुरु नहीं होता, वह व्यक्ति दिशाहीन हो जाता है। गुरु जीवन में मार्ग प्रशस्त करते हैं। हमारे जीवन में चारों तरफ से जब अंधकार छा जाता है, कोई मार्ग दिखाई नहीं देता, तब गुरु ज्योति के रूप में प्रकाश करते हुए हमें मार्ग का बोध कराते हैं। छठे दिन की कथा में विशेष रूप से आचार्य राधे राधे महाराज ने भगवान कन्हैया के विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि कुंडलपुर नरेश की पुत्री रुक्मिणी भगवान कन्हैया के यश एवं प्रताप को सुनकर मन ही मन पति रूप में वरण कर लेती हैं किंतु उनका भाई रूक्मी अपने मित्र शिशुपाल से रुक्मिणी का विवाह निश्चित करता है। तब रुक्मिणी पालीवाल गोत्र के एक ब्राह्मण के हाथों 7 श्लोकों में पत्र लिखकर भगवान कन्हैया को अपने मन की समस्त बातों को बताते हुए निवेदन करती हैं कि आप शीघ्र आकर हमें स्वीकार करें। रुक्मिणी के निवेदन पर भगवान कन्हैया कुंडलपुर आकर के रुक्मिणी का हरण कर रुक्मिणी को अपनी मुख्य पटरानी के रूप में स्वीकार करते हैं। आज की कथा में मुख्य यजमान की भूमिका निभाते हुए चंद्रभान सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी प्रेम देवी ने अपने पुत्र राकेश सिंह एवं पुत्रवधू सतीश देवी के साथ रुकमणी मैया का कन्यादान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उनके साथ गांव एवं क्षेत्र से पधारे आचार्य तनुज भारद्वाज, आचार्य प्रदीप तिवारी, हवा सिंह, राज सिंह, बलराज सिंह, सतवीर सिंह, राकेश सिंह, वेदप्रकाश, सुरेश सिंह, ओम प्रकाश सिंह, रमेश, दिनेश, दीपक सांगवान, कृष्ण सांगवान सहित अन्य मौजूद रहे।