चरखी दादरी। द्रोणाचार्य अवार्डी पहलवान महाबीर फौगाट प्रदेश सरकार की खेल नीति के विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के ज्यादातर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी सरकार की खेल नीति के विरोध में उन्हें अपना समर्थन दे चुके हैं। महाबीर फौगाट ने प्रदेश सरकार की खेल नीति को नकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि भले ही हरियाणा अब पदकों में नंबर वन हो लेकिन आने वाले पांच साल के अंदर पदकों का सूखा झेलेगा। ऐसे गंभीर परिणाम देखने को न मिले, इसके लिए खेल नीति में बदलाव की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवानों गीता, बबीता व रितू फौगाट के पिता महाबीर फौगाट द्रोणाचार्य अवार्डी हैं। सोमवार को उन्होंने चरखी दादरी में पत्रकार वार्ता की। महाबीर ने कहा कि सरकार ने प्रदेश के करीब तीन हजार खिलाड़ियों को समारोह की बजाय खाते से अवार्ड राशि भेजने का फैसला लेकर खिलाड़ी विरोधी सोच का परिचय दिया है। उन्होंने बताया कि अवार्ड राशि समारोह के दौरान मिलती है तो खिलाड़ियों का मनोबल काफी बढ़ता है। उन्होंने कहा कि 24 जून को होने वाले समारोह को सरकार ने रद्द कर दिया और इससे पूरे प्रदेश के खिलाड़ियों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार खिलाड़ियों के लिए केवल घोषणाएं करती है जबकि उन्हें अमलीजामा पहनाने की तरफ ध्यान ही नहीं है।
महाबीर ने कहा कि बड़ी बेटी गीता फौगाट कोर्ट से केस जीतकर डीएसपी बनी है। गीता को डीएसपी बनाने में प्रदेश सरकार का कोई योगदान नहीं है। उन्होंने बताया कि छोटी बेटी बबीता फौगाट ने भी कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने वाली तीसरी बेटी रितू फौगाट अभी तक नौकरी से वंचित है। रितू कुश्ती को अलविदा कहकर एमएमए (मिक्स मार्शल आर्ट्स) की ट्रेनिंग ले रहीं है। द्रोणाचार्य अवार्डी ने कहा कि 2018 कॉमनवेल्थ में पदक जीतने वाले को प्रदेश सरकार ने नौकरी देने की घोषणा की थी जो अब तक पूरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले चार-पांच सालों से खिलाड़ियों की अवार्ड राशि सरकार की तरफ बकाया है। अगर सरकार का ये ही रवैया रहा तो आने वाले पांच साल में हरियाणा पदकों का सूखा झेलेगा।
बबीता और विनेश को मुर्राह नस्ल की भैंस देना भूले धनखड़
प्रेस वार्ता के दौरान महाबीर फौगाट ने कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2018 कॉमनवेल्थ गेम में पदक जीतकर लौटीं बबीता व विनेश फौगाट को कृषि मंत्री ने मुर्राह नस्ल की भैंस देने की घोषणा की थी जो एक साल बाद भी पूरी नहीं की गई। महाबीर फौगाट ने कहा कि प्रदेश की खेल नीति और मंत्रियों की खिलाड़ियों के लिए की गई घोषणाओं की हालत एक जैसी ही है।