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एनसीआर के ब्लड बैंक का सूखा दूर करते हैं झज्जर के रक्तदाता

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झज्जर। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। रक्तदान के चलते किसी को नई जिंदगी मिल सकती है। इसी धुन में झज्जर के रक्तदाता रेडक्रॉस के बैनर तले हर साल नया रिकॉर्ड बनाते हैं। झज्जर के सामान्य अस्पताल में खपत कम होने के चलते यहां के डोनर पूरे एनसीआर के ब्लड बैंक का सूखा दूर करते हैं। रेडक्रॉस के हर साल 100 रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं, जिनमें दिल्ली, रेवाड़ी और रोहतक पीजीआई के ब्लड बैंकों की टीमों को बुलाया जाता है। एनसीआर के इन ब्लड बैंक के लिए भी हर साल झज्जर के युवा रक्तदान करते हैं, क्योंकि झज्जर के सामान्य अस्पताल में रक्त की खपत कम है, लेकिन झज्जर के युवा रक्तदान में पीछे नहीं रहना चाहते, इसलिए बाहर की टीमों को बुलाया जाता है।
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एक साल में 8 हजार यूनिट ब्लड डोनेट
रेडक्रॉस द्वारा चलाए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों का ही नतीजा है कि जून 2018 से अब तक 100 शिविरों में आठ हजार यूनिट रक्त एकत्रित किया जा चुका है। रेडक्रॉस द्वारा इस मुहिम में शहर की छोटी-बड़ी करीब 40 संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को अपने साथ जोड़ा गया है। इसके चलते हर महीने रक्तदान के लिए कैंप चलते ही रहते हैं। वहीं, झज्जर के युवा भी इस में कहीं पीछे नहीं रहते।

पूर्व सैनिक बढ़ा रहे रक्तदाताओं का हौसला
बहराना निवासी पूर्व सैनिक दोस्त हवलदार धर्मपाल अहलावत और कृष्ण चंद अहलावत ने 1 जनवरी 1994 को अपने बीमार दोस्त के खून दिया था। दूसरी बार 1994 में सड़क हादसे में घायल एक अन्य व्यक्ति को खून दिया, उसकी जान बच गई। उसी दिन तय कर लिया कि अपना खून देकर दूसरों की जान बचाने का यह सिलसिला जारी रहेगा। कृष्ण करीब तीन साल पहले राजस्थान बाड़मेर बॉर्डर पर जाकर अपने बीएसएफ यूनिट में कैंप रक्तदान करके आए थे तो सेना के ऑफिसर ने उन्हें सम्मानित किया था। वे अब 59 बार रक्तदान कर चुके हैं। कृष्ण अहलावत के अलावा उनके गांव के ही पूर्व सैनिक धर्मपाल अहलावत भी 77 बार रक्तदान कर चुके है। अब एक गांव के रहने वाले इन दोनों दोस्तों की समाजसेवा की मिसाल अब क्षेत्र में पहचान बन चुकी है। खुद रक्तदान करने के अलावा दोनों दोस्त अन्य लोगों को जागरूक करते है कि रक्तदान करने से किसी प्रकार की कोई कमजोरी महसूस नहीं होती है। अपने इस प्रचार से ये दोनों दोस्त क्षेत्र के 40 लोगों को भी अपने मिशन से जोड़कर उनसे रक्तदान कराते हैं।
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डीसी संजय जून के मार्गदर्शन में रेडक्रॉस द्वारा लगातार जागरूकता कैंप लगाए जाते हैं। रेडक्रॉस की टीम जिले के कॉलेेजों और अन्य संस्थानों में रक्तदान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाती रहती हैं। इससे प्रभावित होकर जिले के लोग रक्तदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इसके फलस्वरूप झज्जर में हर साल करीब आठ हजार यूनिट रक्त एकत्रित होता है। वहीं अब शीघ्र ही इमरजेंसी डोनर की लिस्ट भी वेबसाइट पर अपडेट कर दी जाएगी।
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देवेंद्र चहल, सचिव, रेडक्रॉस सोसाइटी झज्जर।
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