झज्जर। केंद्र सरकार के सांख्यिकीय और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से इस वर्ष जून में सातवीं आर्थिक गणना का कार्य शुरू किया जा रहा है। इस कार्यक्रम की शुरुआत भी इसी महीने से होगी। आर्थिक गणना कार्यक्रम को लेकर जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला शहर के संवाद भवन में आयोजित हुआ। आर्थिक गणना के कार्य को समुचित रूप से सम्पन्न करने के लिए उपायुक्त संजय जून ने जिले के सभी परिवारों से अपील की है कि वे एन्यूमरेटर्स अर्थात गणकों को सही-सही जानकारी दें, ताकि एक मुकम्मल सर्वे किया जा सके। क्योंकि उसी के आधार पर भारत सरकार लोगों के लिए नीतियां एवं कल्याणकारी योजनाएं बना सकेगी। हरियाणा में इस कार्य का जिम्मा कॉमन सर्विस सेंटर और अर्थ एवं सांख्यिकीय विश्लेषण विभाग को दिया गया है। खास बात यह है कि इस बार की गणना मैन्युअल ना करके डिजिटल तरीके से की जाएगी और यह कार्य जिलों में चल रहे कॉमन सर्विस सेंटर के सुपरवाइजरों की देखरेख में प्रगणक की टीम घर-घर जाकर सर्वे के द्वारा पूरा करेगी।
डिजिटल गणना से बचेगा समय
आर्थिक गणना के नोडल अधिकारी प्रभजोत ने बताया कि आर्थिक गणना का कार्य कैसे किया जाना है, इस बारे कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि आर्थिक गणना का कार्य पहली बार कागजी तौर पर न करके इसे डिजिटल तरीके से किया जाएगा, जिसमें समय की बचत होगी। इसके साथ-साथ गणना करने वाली टीम में शामिल बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, जो घर-घर जाकर परिवारों का आर्थिक सर्वे करेंगे।
सर्वे के मुख्य बिंदु
सर्वे में सामान्य तौर पर परिवार के मुखिया का नाम, कुल सदस्य, व्यवसाय तथा आर्थिक गतिविधि का सर्वे किया जाएगा। इसको करने की पूरी जिम्मेदारी कॉमन सर्विस सेंटर की रहेगी, जिसमें सांख्यिकीय एवं योजना अधिकारी सहयोग करेंगे। जिले में वर्तमान में करीब 450 सीएससी सेंटर हैं। उन्होंने बताया कि सर्वे टीम दिनभर परिवारों के पास जाकर आर्थिक गणना का डाटा एकत्रित करेगी और शाम के समय उसे सीएससी के सुपरवाइजर को सौंपेगी। सुपरवाइजर एकत्र किए गए डाटा को अपनी देखरेख में तैयार करके उसे जिला स्तर पर सांख्यिकी या प्लानिंग अधिकारी के कार्यालय में भेजेंगे, जहां से डाटा प्रदेश व भारत सरकार को जाएगा।