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पारा 41 डिग्री सेल्सियस, बूथों पर लगीं लाइनें

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झज्जर। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लाइनें लगी रही। महिला मतदाताओं ने भी अपने मत का जमकर प्रयोग किया। महिला मतदाताओं ने मतदान के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए दोपहर के समय भी लंबी लाइनों में लगी नजर आई। महिलाओं को जोश व जुनून चुनाव के समय देखते ही बन रहा था। महिला मतदाता अपने दुधमुंहे बच्चों को गोद में लिए वोट डालने के लिए लाइन में खड़ी दिखाई दी। वहीं दूसरी ओर महिला मतदाताओं ने अपने-अपने वार्ड में एजेंट की भूमिका का भी निर्वहन किया। ग्रामीण क्षेत्र में महिला कर्मचारी बीएलओ की जिम्मेदारी निभाते हुए भी नजर आई। महिला एजेंट बनाए जानेे की पीछे यह भी मकसद बताया जा रहा है कि कोई महिला किसी दूसरी महिला के स्थान पर वोट न डाल जाए। इसलिए उमीदवारों ने अपने-अपने ओर से महिला एजेंटों को बूथों पर तैनात किया था। बदलते परिवेश को देखते हुए लग रहा है कि आगामी समय महिलाओं के लिए सुखद हो सकता है।
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चिलचिलाती धूप में भी लगी रहीं लाइनें
इसे लोकसभा चुनाव का रंग कहें या फिर अपने प्रत्याशी को जिताने की होड़। तपती दोपहरी में मतदाताओं की लगी लंबी लाइनें तो ऐसा ही कुछ दर्शा रही थी। मतदाताओं ने जो जोश मतदान के दौरान दिखाया वो काबिले तारीफ था। रविवार को शहर का तापमान भले ही 41 डिग्री के आसपास रहा हो लेकिन चुनावी पारा चरम पर था। अक्सर दिनों में रविवार को गर्मी के चलते घरों से बाहर न निकलने वाले लोग पूरे दिन तपती दोपहरी की प्रवाह किए बिना वोट डालने पहुंच रहे थे। वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग व प्रशासन की ओर से मतदाताओं के लिए पीने के पानी के लिए इंतजाम किए गए थे।

वृद्ध व दिव्यांग भी पहुंचे मतदान केंद्र तक
लोकसभा चुनाव के सियासी पारे वाले उछाल ने वृद्ध व दिव्यांगों तक को मतदान केंद्र तक पहुंचने पर मजबूर कर दिया। लोकसभा प्रत्याशियों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने इस पहले चुनाव में एक-एक वोट की कीमत नजर आ रही है। इसके चलते अगर किसी घर में वृद्ध या दिव्यांग व्यक्ति है तो उसे मतदान केंद्र तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा था। इन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए कोई कार से तो कोई बाइक पर इन्हें ला रहा था। वहीं कुछ दिव्यांग अपनी बैसाखी के सहारे ही मतदान बूथ तक पहुंचे व मतदान कर लोकतंत्र में अपना विश्वास जताया।
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