अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। मार्च माह की शुरुआत से ही मौसम पल-पल बदल रहा है। कभी तेज धूप खिलने से तापमान बढ़ता है तो कभी बारिश से ठंड बढ़ जाती है। इस सप्ताह की शुरुआत में मौसम कहीं हद तक खुल गया था, अधिकतम तापमान भी 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था लेकिन बीते दो दिनों से मौसम ने फिर से करवट बदल ली है। वीरवार की सुबह तो इलाके में बूंदाबांदी हुई। कुछ देर बाद बूूंदाबांदी तो थम गई लेकिन आसमान में शाम तक बादल छाए रहे, सूर्य देव के दर्शन भी नहीं हुए। ठंडी हवा और बूंदाबांदी के कारण मौसम में फिर से ठंडक घुल गई। दोपहर के समय तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहा। उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सुनील कौशिक ने कहा कि वीरवार को इलाके में ज्यादा बारिश नहीं हुई। फिलहाल कहीं भी नुकसान की स्थिति नहीं है। तेज बरसात होती है तो सरसों को नुकसान हो सकता है। उधर, मौसम विभाग की मानें तो शुक्रवार और शनिवार को भी इलाके में बूंदाबांदी होने के आसार हैं। आम आदमी पर भले ही इस मौसम से कोई फर्क नहीं पड़ रहा हो, लेकिन किसानों की चिंता जरूर बढ़ गई है। इन दिनों सरसों की फसल पकाई पर है। बहादुरगढ़ उपमंडल में लगभग 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की फसल है। ज्यों ही आसमान में बादल घिरते हैं, इन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें आ जाती हैं। यदि तेज बारिश होती है तो इनकी सरसों की फसल नष्ट हो जाएगी।
तेज धूप नहीं हुई तो गेहूं की फसल को होगा फायदा
यदि बारिश नहीं होती और मौसम इसी तरह ठंडा रहता है तो गेहूं की फसल को लाभ होगा। किसान रवींद्र ने बताया कि मार्च माह के मध्य से तापमान बढ़ने लगता है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार का मौसम गेहूं की फसल के अनुकूल है। यदि मौसम इसी तरह ठंडा रहता है तो दाना मजबूत और मोटा होगा। इससे पैदावार अच्छी होगी, बशर्तें बारिश न हो।