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तीन कमरों में चल रहा है जिला मुख्यालय पशु अस्पताल

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अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। जिले का पशु अस्पताल दो साल बीतने पर भी जरूरी सुविधाओं से जूझ रहा है। पशु अस्पताल इस समय तीन कमरों में चल रहा है। आवश्यक मूलभूत ढांचा नहीं होने से स्टाफ के लिए भी जगह नहीं है। ऐसे में पशु अस्पताल के लिए नए भवन की सख्त जरूरत बनी हुई है। जिले में पुरानी गणना के अनुसार इस समय 2.59 लाख पशु हैं। जिले में स्टाफ, लैब और पशु रोग विशेषज्ञ की भी कमी बनी हुई है।
जिले का पशु अस्पताल उपमंडल की तर्ज पर चल रहा है। चरखी दादरी को जिला बने दो साल बीत गए हैं लेकिन अब तक पशु अस्पताल पूरी तरह से जिले के अनुरूप नहीं बन सका है। पशु अस्पताल का भवन न होने की वजह से काफी परेशानियां बनी हुई हैं। पशु अस्पताल के लिए पर्याप्त भवन न होने से स्टाफ के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। तीन कमरों में जिला पशु अस्पताल चल रहा है। यह भवन भी चार दशक से ज्यादा पुराना है। भवन आधुनिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। ऐसेे में अस्पताल को नया भवन की जरूरत है ताकि आधुनिक स्तर की सुविधाएं मिल सकें। लैब के लिए भी अलग से भवन की जरूरत है ताकि आधुनिक स्तर की लैब स्थापित की जा सके। जिले को जिला स्तर की पशु लैब की जरूरत है। पशुपालकों को गंभीर बीमारियों के टेस्ट हिसार करवाने पड़ते हैं। ऐसे में पशुपालकों को काफी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
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पॉलीक्लीनिक न होने से बन रही परेशानी
जिला स्तर पर पॉलीक्लीनिक भी अनिवार्य होता है। यहां तकरीबन सभी प्रकार की बीमारियों के इलाज की सुविधा दी जाती है। ऑपरेशन की सुविधा भी होती है। इस समय हिसार कृषि विश्वविद्यालय में ऑपरेशन करवाते पड़ते हैं। अस्पताल को आधुनिक भवन की जरूरत है। चिकित्सकों के लिए आवास की सुविधा का होना भी जरूरी है। लैब के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की भी तैनात होनी है। इस समय जिला का पशु अस्पताल अधूरे रूप में ही चल रहा है। हालांकि यहां डिप्टी डायरेक्टर, एसडीओ का पद जरूर सृजित कर रखा है लेकिन जिला के अनुरूप पूरा स्टाफ तैनात नहीं हो सका है। इस समय जिले को पांच पशु रोग विशेषज्ञ की जरूरत है ताकि विशेष बीमारियों का विशेषज्ञों द्वारा इलाज किया जा सके। इस समय विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से पशु अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं क्योंकि गंभीर रोग होने पर पशु को हिसार ले जाना पड़ता है तब तक पशु की हालत बिगड़ जाती है।
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मैहड़ा गांव में 110 पशुओं की हो चुकी मौत
पिछले करीब एक माह से गांव मैहड़ा में पशु बीमारी की चपेट में आकर लगातार दम तोड़ रहे हैं। गत दिनों ही पशु पालक एकत्र होकर लघु सचिवालय पहुंचे थे और उन्होंने डीसी अजय तोमर से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंपा था। ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया था कि गत एक माह में उनके गांव में 110 पशुओं की रहस्य बीमारी से मौत हो चुकी है और मृत पशुओं में 75 फीसदी दुधारू थे।
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