-फोटो 52 : इस्कॉन मंदिर में दीक्षा ग्रहण करते भक्त। स्रोत समिति
बहादुरगढ़। शहर के बामनोली मोड़ पर स्थित इस्कॉन मंदिर में पहली बार विजय दशमी पर्व पर दीक्षा समारोह का आयोजन हुआ। इसमें 140 भक्तों ने हरिनाम दीक्षा और ब्राह्मण दीक्षा ग्रहण की। समारोह में स्वामी प्रबोधानंद सरस्वती महाराज ने गुरु पूजन और विशेष दीक्षा प्रवचन दिया। भक्तों ने श्री श्री राधा मदन गोपाल व श्री श्री निताई चांद गौर सुंदर के दर्शन किए।
स्वामी प्रबोधानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि दीक्षा का अर्थ प्रमाणित गुरु से आध्यात्मिक जीवन के रास्ते पर चलने की औपचारिक स्वीकृति लेना है। इस्कॉन परंपरा के अनुसार हरिनाम दीक्षा लेने वाले भक्त प्रतिदिन 16 माला हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने और चार नियमों का पालन करने का संकल्प लेते हैं।
दीक्षा प्रक्रिया में इस्कॉन डिसाइपल्स कोर्स करना, मंदिर अध्यक्ष से अनुशंसा पत्र प्राप्त करना, दार्शनिक परीक्षा उत्तीर्ण करना और गुरु के साथ साक्षात्कार शामिल होता है। हरिनाम दीक्षा को प्रथम स्तर की दीक्षा माना जाता है जबकि ब्राह्मण दीक्षा दूसरा स्तर है। भक्तों को भक्ति शास्त्री कोर्स पूरा करना अनिवार्य होता है।