अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। होली हमारी संस्कृति से जुड़ा त्योहार है। इस पावन पर्व पर बहुत से लोग जल का दुरुपयोग करते हैं। रसायन युक्त रंग का इस्तेमाल करते हैं। इससे वातावरण प्रदूषित होता है। कई संस्थाओं की ओर से फूलों की होली मनाने की भी परंपरा बढ़ी है। पर्यावरण संरक्षण में जुटे लोग कहते हैं कि होली पर प्यार व सद्भाव को बढ़ाया जाना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है कि हम प्राकृतिक रंगों से होली खेलें।
शक्ति नगर निवासी संजीव मलिक का कहना है कि नागरिक पर्यावरण संरक्षण का ख्याल रखें। कुछ लोग होली के धार्मिक व संस्कृति महत्व को नहीं समझते। मैं हर पर्व, त्योहार पर देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करता हूं। एक-दूसरे को चंदन का तिलक लगाकर होली मनानी चाहिए। साथ ही पानी का बचाव करना चाहिए। पानी हमारे जीवन में बेहद जरूरी है।
खैरपुर निवासी हरदीप छिकारा ने कहा कि होली भाईचारे का संदेश देती है। फिर भी कई बार लगता है कि लोग होली के महत्व को नहीं समझते और नशा करके हुड़दंग मचाते हैं। हमें होली पर इन सब बातों का ख्याल रखना चाहिए। ऐसे ढंग से होली मनानी चाहिए जिससे वातावरण भी प्रदूषित न हो और त्योहार का मजा भी आए।
रमन शर्मा ने कहा कि होली पर कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के प्रयास सराहनीय है। मंदिरों में सामूहिक होली मनाई जाती है। सब लोग मिलकर होली मनाते हैं, अच्छा लगता है। हम सब रसायन युक्त रंगों से दूर रहें। प्राकृतिक रंगों को महत्व दें।
सुमित छिल्लर ने कहा कि होली भाईचारे का त्योहार हैं। हम इस मौके पर पानी की बर्बादी न करें। पानी की एक-एक बूंद कीमती है। पानी के साथ ही सेहत का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। हम सब प्राकृतिक रंगों से होली खेलें। रिश्तेदार और सगे संबंधियों में मिठाइयां बांटे।