अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
बाजरा खरीद में किसानों के लिए आफत कम होने का नाम नहीं ले रही। खरीद के लिए हैफेड ने पहले ये शर्तें रखी थी कि हर किसान अपनी फर्द और गिरदावरी रिपोर्ट लेकर आएगा। अब यह शर्त भी लगा दी गई है कि अगर पांच एकड़ में पांच हिस्सेदार हैं तो सभी को अपनी-अपनी फर्द अलग-अलग लानी होगी और उसे पटवारी से भी तस्दीक करवानी होगी। हैफेड की इन शर्तों से किसान का खर्च बढ़ रहा है। जिसके चलते किसान संशय में हैं कि आखिर वह बाजरा सरकार को बेचे या फिर व्यापारियों को। तहसील के चक्कर काटने से बचने के लिए किसान अब व्यापारियों का रुख करने लगा है। व्यापारियों को फसल बेचने के कारण किसान को प्रति क्विंटल 175 रुपये की चपत लग रही है।
डीसी से मिले आढ़ती
किसानों के साथ आढ़तियों ने मंगलवार को डीसी से मिलकर समस्या उठाई थी। जिसमें उन्हें आश्वासन भी मिला था कि एक खेत में चाहे कितने ही हिस्सेदार क्यों न हो, एक ही फर्द से पूरे बाजरे की खरीद हो जाएगी। लेकिन मीटिंग से लौटते ही अधिकारियों ने पुराने नियम से ही बाजरा खरीद के टोकन जारी करने शुरू कर दिए। जिसके चलते अब फिर से आढ़ती समस्या को लेकर अधिकारियों से मिलने के बारे में सोच रहे हैं।
नहीं हुई खरीद, केवल बांटे टोकन
हैफेड द्वारा खरीद के पहले दिन बाजरे का एक भी दाना नहीं खरीदा। जिसके चलते मंडी में पहुंचे किसानों को मायूसी हाथ लगी। मंडी में पहुंचे अधिकारियों ने किसानों के कागजात की जांच कर 1545 क्विंटल खरीद के लिए किसानों को टोकन दिए। जिनका बाजरा बुधवार को खरीदा जाएगा। किसानों के बाजरे की खरीद अब इसी प्रक्रिया के तहत की जाएगी। पहले दिन किसानों को कागजात जांच कर टोकन दिए जाएंगे और अगले दिन बाजरा खरीदा जाएगा।
शुरू नहीं की बेरी और मातनहेल की मंडी
खरीद के लिए अलॉट की गई बेरी व मातनहेल की मंडी में मंगलवार को खरीद शुरू नहीं की गई। वहीं अगले दो दिन तक भी मंडी में बाजरा खरीद की उम्मीद नहीं की जा रही। जिसके चलते बेरी व मातनहेल क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। अब किसानों के लिए हैफेड की घोषणा भी चिंता का कारण बन रही है, क्योंकि चार हजार क्विंटल के बाद हैफेड खरीद नहीं करेगी।
तीन दिन में होगा टारगेट पूरा, फिर कहां जाएंगे किसान
किसानों के लिए इस समय बड़ी चिंता का विषय यह है कि अगले तीन दिन में बाजरा खरीद का कोटा झज्जर में पूरा हो जाएगा। जिसके बाद जो आवक मंडी में होगी, किसान उसे लेकर कहां जाएंगे। किसानों के बाजरे की खरीद अगर नहीं होती है तो उन्हें व्यापारियों को बेचना पड़ेगा। जिसमें उनका खर्च और भी बढ़ जाएगा। क्योंकि अगर वे व्यापारियों को बाजरा अपने घर पर ही देते तो उन्हें मंडी तक लाने का खर्च नहीं करना पड़ता।
बुधवार को फिर करेंगे बातचीत
मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान नरेंद्र धनखड़ ने कहा कि उन्हें आश्वासन मिला था कि किसानों को समस्या नहीं आने दी जाएगी। अगर किसानों की समस्याओं का हल नहीं हुआ तो बुधवार को फिर से अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
वर्जन
1545 क्विंटल बाजरा खरीद के लिए टोकन जारी किए गए हैं, जिसकी खरीद बुधवार का होगी। वे केवल चार हजार क्विंटल बाजरे की खरीद करेंगे। इससे पूर्व भी अगर कोटा खत्म हो गया तो खरीद बंद कर दी जाएगी। उन्हें इस बारे में उच्च अधिकारियों से आदेश मिले हैं।
- खेत के हिस्सेदारों को अलग-अलग लानी होगी फर्द, शर्तों ने बढ़ाई किसानों की आफत