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13 कर्मचारियों के भरोसे पूरे जिले की फसल, 77 पद खाली

Wed, 05 Apr 2017 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
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झज्जर।
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गेहूं कटाई के इस सीजन में आगजनी की घटना होने पर अगर समय पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंच जाए तो कुछ हद तक किसानों की फसलों को बचाया जा सकता है लेकिन जिले में फायर ब्रिगेड विभाग में कर्मचारियों का टोटा तो है ही उसके साथ गाड़ियां भी कंडम हैं। जिले में विभाग को 90 कर्मचारी चाहिए लेकिन मात्र 13 कर्मचारियों के भरोसे पूरे जिले के किसानों की फसल के साथ साथ अन्य घटनाओं की जिम्मेवारी भी उनके ऊपर है।
 मंगलवार को भी आग लगने के कारण भदानी गांव में एक किसान की फसल जलकर खाक हो गई। ऐसे हालात से निपटने के लिए दमकल विभाग के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। बाकी तो छोड़िए, दमकल विभाग की गाड़ियों के टायर भी कंडम हो चुके हैं, जिससे हादसे के समय गाड़ी के पहुंचने की उम्मीद करना भी बेमानी है। इन हालातों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पूर्व में दमकल को नपा के अंडर किया गया था, जिसे वर्तमान में अलग महकमा बना दिया गया है लेकिन इसके लिए अभी कोई फंड की व्यवस्था नहीं की गई है। वर्तमान में टायरों की खरीद के लिए नपा ने प्रस्ताव तो पास कर दिया है लेकिन उन टायरों के लिए बजट जारी नहीं किया। इसके चलते दमकल गाड़ियां अभी कंडम हो चुके टायरों के सहारे ही दौड़ रही हैं।
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जिले में सिर्फ पांच गाड़ियां
झज्जर क्षेत्र में आने वाले गांवों और शहर के लिए मात्र 5 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की व्यवस्था की है। इनमें से एक टायर खराब होने के कारण कार्यालय में ही खड़ी रहती है। बची 4 चार गाड़ियों के सहारे ही क्षेत्र को संभालने का काम किया जा रहा है। इसके कारण जब भी किसी गांव में इस प्रकार से आग लगने की घटना होती है। सूचना देने के बाद जब 20 मिनट बाद गाड़ी पहुंचती है तो तब तक या तो किसान आग पर काबू पा लेते हैं या फिर फसल जलकर राख हो चुकी होती है।

विभाग में कर्मचारियों का टोटा, 77 पद खाली
झज्जर फायर कार्यालय में 5 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों पर मात्र 13 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। अगर विभागीय दिशा निर्देशों के अनुसार देखा जाए तो प्रति गाड़ी पर 8 घंटे के हिसाब से 6 कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए। इसके लिए 24 घंटे के लिए प्रति गाड़ी के हिसाब से 18 कर्मचारी होने चाहिए। इस हिसाब से कार्यालय में कुल मिलाकर 90 कर्मचारियों की हाजिरी होनी चाहिए। लेकिन स्टाफ की कमी के कारण यहां पर मात्र 13 कर्मचारी ही इस व्यवस्था को संभालने पर मजबूर हैं। जो किसानों की मेहनत को पूरी तरह से बचाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण स्टाफ की कमी होना ही है।

प्रतिदिन मिल रही आग खेतों में आग लगने की सूचना
विभागीय कर्मचारियों का कहना था कि इन दिनों उन पर काफी वर्क लोड बढ़ गया है। स्टाफ की कमी के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही है। गेहूं की कटाई के इस मौसम में अक्सर ही किसी कारणवश खेतों में आग लगने की घटनाएं होती ही रहती हैं। कुछ दिनों पहले गांव दूबलधन में भी खेतों में आग लगने के कारण किसान की सारी फसल जलकर नष्ट हो गई थी। मंगलवार को भी विभाग के पास गांव खूडन माजरा, भदानी और कासनी के खेतों में आग लगने की सूचना आई थी।

क्या कहना है किसानों का
इस बारे में जब क्षेत्र के किसानों राजेश, मुख्तयार, सोमबीर, रमेश और मुनीराम से बात की गई तो उनका कहना था कि गेहूं कटाई के समय पर आग की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इसे रोकने के लिए प्रशासन को इस समय पर खास इंतजाम करने चाहिए। प्रशासन को इस गेहूं कटाई के एक महीने के लिए हर 10 किलोमीटर के क्षेत्र पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी की व्यवस्था करनी चाहिए।
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वर्जन
गेहूं की कटाई का समय है और इस मौसम में गर्म हवाओं के कारण मौसम में नमी खत्म होने के कारण खेतों में आग लगने की घटनाएं होती ही रहती हैं। उन पर काबू पाने की भी भरपूर कोशिश की जाती है। सूचना मिलते ही गाड़ी को घटना स्थल के लिए रवाना कर दिया जाता है। लेकिन 90 कर्मचारियों की जगह सिर्फ 13 कर्मचारी ही है। इससे काफी परेशानी होती है।
- बिजेंद्र डागर, फायर ब्रिगेड इंचार्ज, झज्जर।
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