अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। श्रीमहंत परमानंद गिरिजी महाराज की अध्यक्षता में चल रहे सिद्ध बाबा प्रसाद गिरिजी महाराज का तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का समापन रविवार को विशाल भंडारे के साथ हुआ। समापन अवसर पर श्रीमहंत परमानंद गिरि महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति केवल संन्यास लेकर ही नहीं होती बल्कि गृहस्थ में रहकर भी हम भगवान की भक्ति कर सकते है। उन्होंने कहा कि भारत में अनेक ऐसे संत हुए है जिन्होंने गृहस्थ में रहते हुए भी भगवान की प्राप्ति की है। श्रीमहंत ने कहा कि मनु महाराज ने मनुष्य के लिए चार वर्णों की व्यवस्था की है। जिसके आधार पर सामाजिक व्यवस्था की गई है। ब्रह्मचार्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास। उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम का इतना महत्व है कि भगवान जब भी पृथ्वी पर आते है वो किसी न किसी रूप में गृहस्थ के घर ही जन्म लेते है। उन्होंने कहा कि एक गृहस्थी अपनी मेहनत से अपना कारोबार करके अपना परिवार ही नहीं बल्कि सामाजिक गतिविधियों में भी दान-दक्षिणा देता है। गृहस्थ में रहकर ही वह भगवान की पूजा-अर्चना के लिए भी समय निकालता है। इसलिए गृहस्थ आश्रम को श्रेष्ठ कहा गया है। कथा व्यास ने कहा कि धार्मिक आयोजन हमें अपनी प्राचीन संस्कृति से जोड़े रखने का काम करते है। उन्होंने कहा कि जहां भी सत्संग जैसे कार्यक्रम हो वहां अपने बच्चों विशेषकर युवाओं को जरूर भेजना चाहिए, ताकि उनमें अच्छे संस्कार उत्पन्न हो और बच्चें आगे चलकर समाज की सेवा कर सकें। श्रीमहंत परमानन्द गिरि महाराज ने कहा कि भंडारों का भी सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। भंडारे समाजिक व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते है। विशाल भण्डारे से पूर्व सैकडों की संख्या में दूर-दराज से आए संत महात्माओं को दान-दक्षिणा देकर विदा किया गया। वहीं भण्डारें में हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा का प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर पंडित नरेंद्र शर्मा, आचार्य उपेंद्र कृष्ण, श्री गोशाला के प्रधान प्रमोद बंसल, महाराजा अग्रसेन एजुकेशन ट्रस्ट के प्रधान महेंद्र बंसल, एडवोकेट पंकज शर्मा, गोशाला सचिव संजय गोयल, शंटी तलवार, राजीव बंसल सहित भारी संख्या में बाबा के भक्त मौजूद रहे।