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खेतों से पानी निकासी की डेडलाइन खत्म, खेतों में पानी जमा होने से गेहूं की बिजाई पर भी संकट

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बौंदकलां। प्रदेश सरकार द्वारा प्रशासन को खेतों से पानी की निकासी के लिए 31 अक्तूबर की तारीख निर्धारित की थी। यह समय सीमा पूरी होने के बाद भी मालकोष मार्ग पर 100 एकड़ भूमि में पानी भरा हुआ है। जलभराव होने के कारण कपास और धान की फसल बर्बाद हो चुकी है। पानी की निकासी नहीं होने से गेहूं की बिजाई भी संकट में है। किसान बंसी शर्मा की 15 एकड़, लाला नंबरदार की 15 एकड़, रामपाल सिंह की 17 एकड़, महाबीर मालकोष की 8 एकड़, अनूप चौधरी की 10 एकड़, वेदपाल चहल की 6 एकड़, धर्मचंद की 7 एकड़, सुभाष की 5 एकड़, दले की 5 एकड़ रबिया शर्मा की 7 एकड़, राजेंद्र की 2 एकड़ व पप्पू की 2 एकड़ भूमि पर अभी जलभराव की समस्या बनी हुई है। किसानों ने बताया कि सिंचाई विभाग ने जलनिकासी के लिए दो मोटरें लगा रखी हैं। दूरी ज्यादा होने के कारण जलनिकासी मंद गति से चल रही है। नवंबर महीना आरंभ हो चुका है। अभी भी खेतों में डेढ़ फीट तक पानी जमा है। ऐेसे में किसानों की पहले ही कपास, बाजरा और धान की फसलें बर्बाद हो चुकी है। ऐसे में रबी की बिजाई पर भी संकट के बादल छा गए है। किसानों ने प्रशासन को चेताया कि यदि जल्द ही पानी निकासी खेतों से नहीं करवाई गई तो किसान चार नवंबर को चरखी दादरी में सीएम से मिलकर गुहार लगाएंगे।
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इस बारे में सिंचाई विभाग की मेकेनिकल शाखा के जेई आशीष कुमार ने बताया कि 100 एकड़ भूमि में जलभराव तो हुआ ही नहीं है। कुल में ही 60 एकड़ में जमा था। विभाग ने दो मोटरें पानी निकासी के लिए लगा रखी है। फिलहाल ढलान वाले खेतों में ही पानी बचता है जो कि तीन चार दिनों में ही निकलवा दिया जाएगा।
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