अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
गेहूं खरीद में मार्केट कमेटी के द्वारा गजब खेल किया जा रहा है। गेहूं की खरीद होने के बाद ही किसानों को गेट पास दिया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि चंडीगढ़ भेजे जाने वाली रिपोर्ट में आवक पेंडिंग न मिले। हैफेड के द्वारा पिछले चार दिन से झज्जर अनाज मंडी में गेहूं की खरीद नहीं की गई। इसके चलते करीब एक लाख क्विंटल गेहूं बिना खरीद के पड़ा हुआ है। जब मंडी में पड़े गेहूं की खरीद होकर उठान नहीं होगा, तब तक आढ़तियों के खाते में हैफेड की ओर से उसकी पेमेंट नहीं आएगी। आढ़तियों को पेमेंट नहीं मिलने के कारण किसान भी आढ़तियों के पीछे-पीछे पेमेंट के लिए चक्कर लगा रहे हैं। वहीं, अधिकारी स्टाफ की कमी के चलते गेट पास गेहूं की खरीद के बाद देने की बात कह रहे हैं।
झज्जर मंडी में गेहूं खरीद पर रोक लगाने के पीछे मुख्य वजह बारदाने की कमी भी रही। हैफेड के पास सोमवार को दो लाख बैग का बारदाना था। जोकि पूरा होने के बाद खरीद बंद कर दी गई। हैफेड अधिकारियों ने कहा कि जब तक उठान नहीं हो जाता, नई खरीद का कोई फायदा नहीं है। साथ ही गेहूं के बैगों के ढेर लगने के डर से भी नहीं खरीद की गई।
एसडीएम के निर्देश पर शाम को हुई खरीद
आढ़तियों ने खरीद न होने के बारे में एसडीएम रोहित यादव को बताया, इसके बाद हैफेड द्वारा शनिवार शाम करीब तीन बजे के बाद खरीद शुरू की गई। हैफेड के द्वारा शनिवार को 15 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद की गई। आढ़तियों के अनुसार हैफेड उनकी समस्या को नहीं समझ रहा क्योंकि किसान उनके पास पैसे के लिए चक्कर लगा रहे हैं। गेहूं की खरीद के बिना वे पैसे भी नहीं दे सकते।
बोले आढ़ती
आढ़ती चांद पहलवान ने कहा कि किसान पेमेंट के लिए चक्कर काट रहे हैं। आढ़तियों के पास पैसे नहीं हैं क्योंकि मार्केट कमेटी ने गेहूं की जो आवक हुई है, उसका गेट पास नहीं दिया है। अगर आवक रिकॉर्ड में दर्ज हो जाए तो हैफेड को पैसे देने होंगे। इसलिए मार्केट कमेटी के अधिकारी आवक दर्ज ही नहीं कर रहे।
अधिकारियों ने दिया ये तर्क
मंडी में किसान की ट्रॉली आते ही गेट पास बनाने का प्रयास किया जाता है। मंडी के तीन गेट हैं, लेकिन गेट पास बनाने वाले केवल दो कर्मचारी हैं। इसके चलते किसान बगैर गेट से मंडी में घुस जाते हैं। इसलिए खरीद के समय किसान को गेट पास दिया जाता है।
- सुरेश, सुपरवाइजर, मार्केट कमेटी झज्जर।