अमर उजाला ब्यूरो
बादली। बाढ़सा स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में आधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं। संस्थान में जो मशीनें लगी हैं वे इतनी अत्याधुनिक हैं कि किसी भी निजी व सरकारी अस्पताल में नहीं है। रोगियों को बेहतर इलाज देने के लिए संस्थान में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है। भले ही अभी संस्थान केवल ट्रायल बेस पर चालू है मगर तकनीक को देखते हुए देश के बड़े-बड़े कैंसर अस्पतालों से आगे हैं। संस्थान में 48 करोड़ की लागत से एक्सटर्न रेडिएशन में इस्तेमाल होने वाले दो लीनियर एक्सलरेटर हैं जबकि सीटी स्कैन और एक्स-रे मशीन भी रोगियों के लिए होंगी। संस्थान के निदेशक एवं डॉ. एंजल के अनुसार बाढ़सा कैंसर संस्थान के पूरी तरह से संचालित होने पर यह भारत में कैंसर केयर के लिए एक नोडल संस्थान के रूप में काम करेगा। यह देश का सबसे बड़ा कैंसर अस्पताल नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट है। ट्रायल के तौर पर 30 बेड इमरजेंसी और ओपीडी शुरू होने से चिकित्सा क्षेत्र में भी खुशी का माहौल बना है।
देश की सबसे बड़ी पहली लेब्रोरेट्री
बाढ़सा कैंसर संस्थान में देश की सबसे बड़ी लैब स्थापित हो चुकी है। रोबोटिक कोर क्लीनिकल लेब्रोरेट्री में किसी भी सैंपल की जांच और रिपोर्ट के लिए महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। तैयार हो चुकी लैब में प्रतिदिन 60 हजार सैंपल प्रोसेस करने की क्षमता है। दिल्ली और मुंबई के बड़े कैंसर अस्पतालों की लैब में भी रोगियों की जांच रिपोर्ट जहां महीनों में तैयार होती है, वहीं बाढ़सा संस्थान की लैब की रिपोर्ट सीधे तौर पर रोगी के रजिस्ट्रेशन नंबर में दर्ज हो जाएगी।
हर रोगी को मिलेगी सुविधा
करीब 300 एकड़ पर स्थापित बाढ़सा कैंसर संस्थान में हर रोगी को इलाज का लाभ मिलेगा जबकि दिल्ली के एम्स में आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 400 रोगियों का ही चेकअप हो पाता है। मरीजों के आंकड़ों को देखा जाए तो प्रतिदिन 1300 रोगी इलाज के लिए एम्स पहुंचते हैं, जिसमें सुविधाओं के अभाव में आधे से ज्यादा रोगियों को इलाज नहीं मिल पाता।