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दो साल से है प्रदूषण जांच मशीन खराब, फिर भी कागजों में फिट है रोडवेज लारी

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
रोडवेज विभाग पिछले काफी समय से एनजीटी के आदेशों को धुएं के गुब्बार में उड़ा रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि रोडवेज के झज्जर डिपो की प्रदूषण जांच मशीन पिछले दो साल से खराब पड़ी है। इसके बावजूद डिपो की बसों को हर तीसरे माह कागजों में फिट कर दिया जाता है। जांच के नाम पर डिपो में खानापूर्ति चल रही है। विभागीय अधिकारी बसों को कागजात में फिट करवाने के लिए डिपो में ही सर्टिफिकेट बना देते हैं। सरकारी गाड़ियां होने के चलते कोई अधिकारी बसों को चैक भी नहीं करते, जिसका पूरा फायदा रोडवेज के लापरवाह अधिकारी उठा रहे हैं।

दिल्ली में डर तो वहां बनवा लेते हैं सर्टिफिकेट
प्रदेश में रोडवेज बसों के चालान कटने का कोई भय नहीं है, इसलिए यहां पर केवल खानापूर्ति की जाती है। वहीं दिल्ली में कागजात पूरे नहीं होने पर हरियाणा रोडवेज का चालान कर दिया जाता है, जिसकी वजह से रोडवेज अधिकारी दिल्ली रूट पर जाने वाली सभी बसों का दिल्ली से ही फोटो युक्त प्रदूषण जांच सर्टिफिकेट बनवा लेते हैं। विभाग के अधिकारी इन बसों के लिए हर तीसरे माह सर्टिफिकेट बनवाते हैं, जिस पर प्रति बस रोडवेज 100 रुपये खर्च करती है।
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दो साल में ठीक नहीं हुई मशीन
रोडवेज के अधिकारियों की मानें तो करीब दो साल पूर्व झज्जर डिपो की प्रदूषण जांच मशीन खराब हो गई थी। मशीन की ठीक करवाने के लिए जिस प्रकार के प्रयास विभाग के अधिकारियों के द्वारा किए गए, वो साफ दिखाई पड़ रहे हैं। अगर प्रयास किए जाते तो अभी तक मशीन ठीक हो जाती, लेकिन जब इसकी आवश्यकता ही नहीं तो अधिकारी भला इसके लिए क्यों प्रयास करते।
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बसों में लगे हैं पुराने सर्टिफिकेट
रोडवेज बसों में वर्ष 2016 व 2017 में एक्सपायर हो चुके सर्टिफिकेट लगे हुए हैं। जब इस बारे में रोडवेज चालकों से बात की गई तो नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि जब दिक्कत आती है तो रोडवेज अधिकारी अपने आप नये सर्टिफिकेट यहां पर चिपका देते हैं। डिपो में तो पिछले काफी समय से ही मशीन खराब पड़ी है।

रोडवेज जीएम लेखराज से सीधी बातचीत
सवाल- रोडवेज बसों के प्रदूषण की जांच कैसे होती है?
जवाब- मशीन तो खराब है, लेकिन बाहर से जांच करवाई जाती है।
सवाल- बसों में तो रोडवेज डिपो के सर्टिफिकेट लगे हुए हैं?
जवाब- हां, वो दूसरे डिपो से मंगवा कर सर्टिफिकेट बनवाए थे।
सवाल- आखिरी बार कब जांच हुई थी?
जवाब- तीन माह पहले पानीपत से मशीन मंगाकर करवाई थी।
सवाल- बसों में सर्टिफिकेट तो दो साल पुराने लगे हैं?
जवाब- रिकॉर्ड चैक करवा कर, अभी नए लगवा देंगे।
सवाल- डिपो में ऐसे ही बन जाते हैं क्या सर्टिफिकेट?
जवाब- नहीं, जांच के समय के ही रखे होंगे।
सवाल- दिल्ली जाने वाली बसों की किस प्रकार से जांच होती है?
जवाब- वहां फोटो वाला मांगते हैं तो बाहर से ही करवाते हैं।
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