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नगर परिषद व ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही से चालू नहीं हो रही ट्रैफिक लाइटें

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
शहर की यातायात व्यवस्था कितनी अच्छी है इसका जीता जागता उदाहरण शहर में विभिन्न स्थानों पर लगी ट्रैफिक लाइट्स हैं। ये तीन महीने पहले लगाई गई थी। तभी से महज शोपीस बनी हुई हैं। यातायात पुलिस और नगर परिषद के अधिकारियों को इस बात की चिंता ही नहीं है कि शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु करने के लिए इन बंद पड़ी लाइटों को सुधारा जाए। यह ट्रैफिक लाइटें लगातार ब्लिंक करती रहती हैं।
दो दिन में होंगी ट्रैफिक लाइटें चालू, कहा था एसएचओ ट्रैफिक ने
ट्रैफिक पुलिस प्रभारी की ओर से एक सप्ताह पहले शहर में लगी ट्रैफिक लाइटों को दो दिनों में चालू करवाने की बात कही गई थी। मगर एक सप्ताह बीतने के बाद भी ये लाइटें जस की तस हैं। ऐसे में यह बात उजागर होती है कि अधिकारी केवल पल्ला झाड़कर अपने कार्य की इतिश्री करते हैं। इन लाइटों को लगाने में 30 लाख की राशि खर्च की गई थी। ये लाइटें वाहन चालकों के किसी काम नहीं आ रही। नप और ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही अब तक यह चालू नहीं हो पाई है।
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नहीं आता ट्रैफिक लाइटों का कोई मां-बाप नजर
प्रशासन द्वारा शहर की यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए जो ट्रैफिक लाइट झज्जर मोड़, बादली चुंगी, नाहरा-नाहरी मोड़, रेलवे रोड मोड़ पर लगाई गई थी। अब उनकी देखरेख करने वाला कोई नजर नहीं आता है। यही वजह है कि शहर की यातायात व्यवस्था बिगड़ी रहती है। ट्रैफिक पुलिस अधिकारी केवल चालान काटने में मदमस्त रहते हैं। इस वजह से ट्रैफिक व्यवस्था सामान्य नहीं हो पाती है। नगर परिषद के अधिकारी ट्रैफिक पुलिस द्वारा इन लाइटों के प्वाइंटों को ब्लिंक मोड पर करने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं तो ट्रैफिक पुलिस अधिकारी नप द्वारा इनका टाइम सैट न करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में दोनों की लापरवाही के चलते सरकार के लाखों रुपये पानी हो रहे हैं।
सुबह, दोपहर और शाम के समय होती है ज्यादा परेशानी
शहर में जिन स्थानों पर ट्रैफिक लाइटें लगाई गई हैं। वहां पर सुबह, दोपहर व शाम के समय ज्यादा भीड़भाड़ रहती है। अधिकारी इतने लापरवाह हो गए हैं कि उनका ध्यान इस तरफ है ही नहीं। ऐसा भी नहीं है कि वे इन चौक-चौराहों से आते-जाते न हों, लेकिन अधिकारी जानबूझकर आंखें बंद किए हुए हैं और सरकारी पैसे का खूब दुरुपयोग किया जा रहा है।
नियम रहते हैं ताक पर
शहर में कहीं भी ट्रैफिक कंट्रोल के लिए रेड लाइट चालू नहीं है। कई बार चालक वाहन को जल्दी निकालने के लिए रांग साइड में आते हैं और हादसे का कारण बनता है। इसके अलावा तेज रफ्तार के कारण रोड के किनारे चल रहे पैदल और साइकिल सवार हादसों का शिकार बनते हैं।
लापरवाह पुलिस कर्मी
शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। ट्रैफिक प्लान लागू नहीं होने और नियमों का पालन कराने में ट्रैफिक पुलिस की दिलचस्पी ही नहीं है। ट्रैफिक सुधार के नाम पर पुलिस सिर्फ वाहनों की जांच कर उनका चालान करती है। इससे आगे की कार्रवाई नहीं होना हादसों का मुख्य कारण बनता है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
एडिशनल एसपी लोकेंद्र सिंह का कहना है कि बाहरी क्षेत्र में लगी लाइटें चालू करने के अधिकारियों से बातचीत की है। शहर में लगी ट्रैफिक लाइटों को चालू करने के बारे में नगर परिषद के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी और जल्द ही ट्रैफिक लाइटों को चालू कराया जाएगा।
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