बहादुरगढ़। ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए विदेश की तर्ज पर सात साल पहले बनाई गई मल्टीलेवल पार्किंग में अब तक कोई भी वाहन खड़ा नहीं हो सका। यह पार्किंग पुराने कोर्ट के बाहर 24 लाख 75 हजार की लागत से बनाई गई थी। इससे सरकार को आर्थिक लाभ हो, लेकिन आज तक सरकार को एक रुपये का फायदा नहीं हुआ।
बता दें कि बहादुरगढ़ का पुराना कोर्ट अब बालौर में शिफ्ट हो गया है। लेकिन वर्ष 2013 में बहादुरगढ़ के तत्कालीन कोर्ट में हर रोज एक हजार से अधिक वाहनों का आवागमन रहता था। वाहन संचालक बेतरतीब ढंग से वाहनों को पार्क कर देते थे। जिससे जाम की स्थिति बन जाती थी। उस समय के निदान के लिए प्रशासन ने वर्ष 2013 में पुराने कोर्ट में इलेक्ट्रानिक मल्टीलेवल पार्किंग लगवाई थी। लेकिन सात साल बीत जाने के बाद आज तक इस पार्किंग में एक भी वाहन नहीं पार्क हुआ। लाखों की लागत से बनी पार्किंग से सरकार को आर्थिक लाभ होता, लेकिन कोर्ट के बालौर शिफ्ट होने के चलते इस मल्टीलेवल पार्किंग से एक रुपये की कमाई न हो सकी।
लोहे का ढांचा होने लगा कबाड़
मल्टीलेवल पार्किंग के दोनों तरफ बने लोहे का ढांचा प्रयोग में न आने की वजह से एक दम कबाड़ होने लगा है। पार्किंग प्लेट गलकर गिरने लगी हैं। सरकारी खजाने के लगभग 24,7500 रुपये बर्बाद होने के बाद भी लोगों को लाभ नहीं मिला। इसके साथ जिस जगह पार्किंग बनी है। वह जगह भी बेवजह बर्बाद हो रही है।
पार्किंग की जानकारी लेने पर अधिकारी टाल देते हैं
मल्टीलेवल पार्किंग बंद होने के संबंध में जानकारी के लिए यादि कोई व्यक्ति अधिकारी के पास जाता है तो अधिकारियों का प्रयास रहता है तो किसी तरह इस बात को टाल दिया जाए। आरटीआई के तहत जानकारी मिली कि इन पार्किंग को सुचारु करने के लिए न किसी तरह का शुल्क लगाया गया और न ही कोई रुपये सरकार को मिला। आरटीआई कार्यकर्ता राहुल मंडोरा को नगर परिषद ने दिए जवाब में बताया कि पार्किंग को शहरवासियों की सहूलियत के लिए बनाया गया था। पुराने कोर्ट के बहार पार्किंग मशीन स्थानीय शहरी निकाय हरियाणा से स्वीकृति के बाद तत्कालीन डीसी के आदेश वर्ष 2013-14 में नगर परिषद ने लगाई थी। जबकि जवाब में ये नहीं बताया गया कि पार्किंग में कितने वाहन अभी तक पार्क हुए।
कोई भी अधिकारी इस पर नहीं देता ध्यान
मल्टीलेवल पार्किंग लगवाने वाले तत्कालीन डीसी अजीत बालाजी योगी के बाद कई डीसी आए और गए। लेकिन किसी ने इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। सरकारी रुपये पूरी तरह से बर्बाद हो रहा है। कोई अधिकारी इसकी सुध भी नहीं ले रहा। न ही मल्टीलेवल पार्किंग की जगह को खाली करवाने की किसी ने जरूरत समझी। जिस वजह से वह किसी के इस्तेमाल में नहीं आ रही।
पत्र लिखने के बाद भी नहीं सुधरी पार्किंग
आरटीआई कार्यकर्ता राहुल मंडोरा की आरटीआई में जवाब आया कि मल्टीलेवल पार्किंग को सुधारने के लिए महाराष्ट्र की एक कंपनी को पत्र लिख कर सुधारने के लिए कहा गया है। इस बात को बीते हुए कई साल हो गए, लेकिन अभी तक पार्किंग जस की तस है। राहुल मंडोरा ने बताया कि अधिकारी जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद करने में जुटे हैं। अब तो यह पार्किंग कबाड़ में ही जाएगी।
डीसी को इस मल्टीलेवल पार्किंग को लेकर पत्र लिख जाएगा। पार्किंग को नए कोर्ट के बाहर शिफ्ट करने की सिफारिश की जाएगी। सरकारी पैसा बर्बाद नहीं होगा। इसे इस्तेमाल में जरूर लाया जाएगा।
तरुण पावरिया, एसडीएम, बहादुरगढ़ उपकेंद्र।