अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। होली का त्योहार परंपरा के अनुसार बुधवार को मनाया गया और महिलाओं ने जहां उपवास रखते हुए होली पूजन किया और सायंकाल सूर्यास्त के बाद गांव व शहर में होली मंगलाई गई। होलिका दहन में लोग समृद्धि की प्रतीक मानी जाने वाली जौ की बालियां व गोला भूनकर घर लाएं। होलिका दहन के मौके पर गाए जाने वाला होला अब किसी-किसी गांव में ही सुनने को मिलता है लेकिन होली दहन के दौरान युवाओं ने प्रहलाद भक्त के रूप में गाडे़ गए डांडे को होली की आग की लपटों से सुरक्षित निकालने में जान की भी परवाह नहीं की और होली की प्रचंड लपटों में से डांडे को सुरक्षित निकाला। युवाओं व बच्चों ने होली के मौके पर मस्ती के साथ एक-दूसरे पर रंग-गुलाल व पानी डालते हुए होली खेली। हालांकि होली का उत्साह इस बार काफी फीका रहा है। गांवों व शहर में होली के लिए सवा माह पूर्व बसंत पंचमी के दिन डांडा गाड़ा गया था और जिस स्थान पर होली मनाई गई वहां प्रात:काल ही गांव व शहर में महिलाओं की टोलियां सज-धजकर हाथ में गोबर से बने ढाल-बिडकलों के साथ पूजा को पहुंची। महिलाओं ने बच्चों संग भी होली की पूजा की और पूजा के बाद होली परिक्रमा कर परिवार व सुख शांति के लिए कामना की। होली पूजन के बाद भी महिलाओं ने जल व अन्न ग्रहण किया।
शाम सात बजे हुआ होलिका दहन
गांवों व शहरों में बनाई गई होलियों का दहन का सिलसिला सायंकाल 7 बजे के उपरांत शुरू हो गया। हालांकि पंडितों ने शुभ लगन में होली मंगलाने व पूजा करने को लाभकारी बताया था लेकिन पंडितों की बताई गई बात की परवाह न करते हुए महिलाओं ने समयानुसार पूजा की और होली बिना शुभ लगन के ही मंगलाई गई। झज्जर शहर में बेरी गेट शिवमंदिर, रामलीला ग्राउंड, किला कालोनी सहित आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर होली पूजन व दहन किया गया।
50 वर्षों से होली बनाने की परंपरा निभा रहा है सैनी परिवार
पिछले करीब 50 वर्षों से होली का डांडा गाड़ने व होली बनाने वाले पूर्व पार्षद डॉ. जयभगवान सैनी ने बताया कि कोसली रोड स्थित किला कॉलोनी में मनाई जाने वाली होली का डांडा गाड़ने व ईंधन आदि का प्रबंध पहले परिवार करता है और उसी परंपरा को अब वे भी निभाते आ रहे हैं। यहां बनने वाली होली पर बड़ी संख्या में छावनी मोहल्ला, किला कालोनी व मॉडल टाऊन, विकास नगर के लोग भाग लेते हैं।