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बुद्घिजीवी बोले, छात्राएं होकर करें इंटरनेट का इस्तेमाल

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़। वैश्य बीएड कॉलेज में एनसीडब्ल्यू की ओर से एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इंटरनेट की दुनिया में महिलाओं के खिलाफ अपराध के लिए योजनाएं और रणनीति विषय पर आयोजित इस सेमिनार में छात्राओं को इंटरनेट इस्तेमाल के फायदे और नुकसान की जानकारी दी गई। छात्राओं को इंटरनेट के सही इस्तेमाल करने की भी जानकारी दी गई। सर्वप्रथम दो मिनट का मौन धारण कर पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। सेमिनार में प्रात: कालीन सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर डॉ. प्रोमिला बत्रा (डिपार्टमेंट ऑफ साइकोलॉजी, एमडीयू रोहतक), डॉ. रेनू यादव (डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा, महेंद्रगढ़), डॉ. नीरज अहलावत (डिप्टी डायरेक्टर, वुमन स्टडी सेंटर, एमडीयू रोहतक), मिस भारती डबास (डीएसपी, झज्जर) और डॉ. राजेंद्र छिल्लर (प्रोफेसर एंड हेड, डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशंस, एमडीयू रोहतक) ने की। इन बुद्धिजीवियों का कॉलेज के प्रधान सत्यनारायण अग्रवाल व प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने स्वागत किया। डॉ. प्रोमिला बत्रा ने कहा कि महिलाओं को सतर्क रहने की जरूरत है। फेसबुक, इंस्टाग्राम व व्हाट्सएप आदि सोशल साइट्स पर अपनी फोटो न लगाएं और सोशल मीडिया पर अपनी सारी जानकारी न डालें। डॉ. रेनू यादव ने कहा कि सबसे ज्यादा अपराध फेसबुक से होते हैं। फेसबुक अकाउंट रखना गलत नहीं है, लेकिन उस पर रोजमर्रा की गतिविधियां न डालें। डॉ. नीरजा अहलावत ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि ..एक महिला फेसबुक पर अपनी फोटो डालती है ताकि उसे प्रशंसा मिल सके। यहीं से वह भावुक होकर अपने सारे पासवर्ड बता देती है और गलत मित्र बनाकर इंटरनेट के माया जाल में फंस जाती है। डॉ. राजेंद्र ने कहा कि इंटरनेट पर डाला डाटा बहुत महत्वपूर्ण है। हमें पासवर्ड किसी को बताना नहीं चाहिए। पासवर्ड स्ट्रांग होना चाहिए। डीएसपी भारती डबास ने कहा कि आज तकनीक बहुत एडवांस हो गई है। हम जो सोशल मीडिया पर अपनी फोटो डालते हैं या नहीं डालते तो भी हमारी फोटो का गलत प्रयोग हो जाता है। इसलिए हमें अपने पासवर्ड अपने तक ही सीमित रखने चाहिए। एक जैसी कई साइट होती हैं जिसमें कई गलत होती हैं। हमें उन साइट्स पर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह साइट हमारे सारे डेटा की जानकारी ले लेती है और फिर महिलाओं का शोषण होता है। मध्य कालीन सत्र की अध्यक्षता डॉ. संतोष मुदगिल (पूर्व प्राचार्या, वैश्य आर्य कन्या महाविद्यालय बहादुरगढ़), करमिंदर कौर (प्रोटेक्शन प्रोहिबिशन ऑफिसर, स्पेशल विमेन सेल रोहतक), डॉ. नसीब सिंह गिल (डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशंस, एमडीयू रोहतक) और डॉ. रेनू गुप्ता (प्रोफेसर एंड हेड, डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन, शारदा यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम) ने की।
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बच्चियों को करें जागरूक : करमिंदर
डॉ. नसीब सिंह गिल ने कहा कि माउस के एक क्लिक पर हमें सारी जानकारी प्राप्त हो जाती है, इसलिए हम इंटरनेट की ओर आकर्षित हो जाते हैं। करमिंदर कौर ने कहा कि नाबालिग लड़कियां भी सोशल साइट्स का प्रयोग करती हैं और उन्हें अपने भले बुरे का ज्ञान नहीं होता। हमें अपनी बच्चियों को जागरूक करने की आवश्यकता है। डॉ. संतोष मुदगिल ने कहा कि हम एक पुरुष प्रधान देश में रहते हैं जहां औरतों को सिर्फ एक वस्तु समझा जाता है। इसलिए महिलाएं इंटरनेट की ओर आकर्षित होती हैं। अपनी निजी जानकारी एक दूसरे को बता देती हैं और फिर अपराध का शिकार हो जाती हैं। डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि आजकल लोग एक दूसरे से आमने-सामने बात न करके अपने फोन में लगे रहते हैं। युवा फेसबुक पर अपनी फ्रेंड्स लिस्ट बड़ी करने की होड़ में किसी भी अंजान को दोस्तों की सूची में शामिल कर लेते हैं और अपराध का शिकार हो जाते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। सेमिनार का समापन राष्ट्रगान से किया गया। सेमिनार में सत्यनारायण अग्रवाल, शिवनारायण गुप्ता, राधेश्याम काबरा, इंद्र कुमार नागपाल और गजानंद गर्ग भी उपस्थित रहे।
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