अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। इस समय डिपो की बसों की ढंग से साफ-सफाई नहीं हो पा रही और यात्रियों को इसके चलते दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। दरअसल, ढाई साल पहले रोडवेज वर्कशॉप की मशीन खराब हुई थी, इसके बाद से ही कर्मचारी हाथों से बसों को साफ करते हैं। इससे समय और मेहनत ज्यादा लगती है। करीब छह माह पहले वर्कशॉप को मिली नई मशीन लगाने के लिए विभाग के पास बजट नहीं है और इसके चलते नई मशीन खुले में पड़ी है। करीब दो लाख कीमत की मशीन खुले में पड़ी होने से जंग खा रही है और जल्द ही इसे प्रयोग में नहीं लाया गया तो यह कबाड़ बन जाएगी।
रोडवेज वर्कशॉप में करीब ढाई साल पहले वॉशिंग मशीन खराब होने से बसों की साफ-सफाई व धोने के लिए अधिकारियों ने तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी थी जबकि पहले यहां एक ही कर्मचारी तैनात था। हर रोज डिपो की 30 से अधिक बसों की रोडवेज वर्कशॉप परिसर में सफाई होती है। इस समय डिपो में करीब 150 बसें हैं और इनमें से 20 प्रतिशत ही बसें प्रतिदिन अब धुल पा रही हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो मशीन जिस समय वर्किंग में थी उस समय 50 से 60 बसों की धुलाई की जाती थी। डिपो की बसों में प्रतिदिन करीब 45 हजार यात्री सफर करते हैं। डिपो की ज्यादातर बसें इस समय 30 से 35 ट्रिप प्रतिदिन मारती हैं और इसके चलते इन बसों में काफी तादाद में गदंगी व धूल मिट्टी जमा हो जाती है। मशीन की बजाय कर्मचारियों के हाथों से धुलाई करने पर न तो बस की अंदर से ढंग से धुलाई हो पाती है और न ही शीशे साफ हो पाते हैं।
तीन कर्मचारी होने के बावजूद लगता है सफाई में तीन गुना समय
पहले जहां मशीन से धुलाई के लिए एक कर्मचारी ही बस की धुलाई 10 मिनट में कर देता था। वहीं, मशीन खराब होने चलते तीन कर्मचारी लगाने पर भी एक बस की सफाई में करीब 30 मिनट लग जाते हैं और बस के सभी शीशे और अंदर पड़ी गंदगी भी ठीक से साफ नहीं हो पाती।
हमने मशीन लगवाने के लिए बेसमेंट का एस्टिमेट तैयार करवा लिया है। जल्दी ही नई वॉशिंग मशीन को वर्किंग में लाकर बसों की धुलाई शुरू करवा देंगे।
-नवीन शर्मा, वर्कशॉप मैनेजर, चरखी दादरी डिपो