झज्जर। शहर के बहादुरगढ़ रोड स्थित मकबरों का तीन करोड़ से सुंदरीकरण किया जाएगा। पुरातत्व संरक्षण विभाग इस पर काम करेगा। मकबरे के 300 मीटर दायरे में निर्माण पर रोक रहेगी। पुरातत्व सरंक्षण विभाग की और से 300 मीटर के दायरे में करीब 1200 से ज्यादा लोगों को नोटिस दिए जा चुके हैं। आगे निर्माण करने वालों पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
फिलहाल 35 लाख रुपयों से सुंदरीकरण का काम शुरू का दिया गया है। मकबरों के परिसर में रेलिंग लगाने का काम किया जा रहा हैं। इन मकबरों के परिसर में जलभराव को खत्म करने के लिए मिट्टी का भरत करवाया जाएगा और बारिश के पानी को सोखने के लिए 45 फुट के दो गड्ढे बनवाकर वाटर हार्वेस्टिंग की जाएगी। बारिश के पानी को तकनीक की सहायता से पीने के योग्य मकबरे के परिसर में बनाया जाएगा। उन सभी मकबरों को दोबारा से मुगलकालीन शैली में बनाया जाएगा। पुरातत्व विभाग ने करीब 30 वर्ष बाद इन मकबरों की सुध ली है। इस काम को करने के लिए करीब 12 कर्मचारी लगे हुए हैं। राजमिस्त्री आगरा से मंगवाए गए हैं। हिंदी फिल्म मंगल पांडे के कुछ दृश्य झज्जर के मकबरों के दृश्याएं गए थे। उस समय फिल्म अभिनेता आमिर खान व अन्य कलाकार कुछ दिनों तक झज्जर के मकबरों में रहकर फिल्म शूटिंग की थी। उस समय मकबरों का रखरखाव व सफाई व्यवस्था को प्रशासन की ओर से करवाना शुरू किया गया था, जो अब भी जारी हैं।
लाल पत्थर से बनेगा नोटिस बोर्ड व भव्य गेट
लाल पत्थर से मुख्य गेट पर नोटिस बोर्ड बनवाए जाएंगे, जिसमें मकबरों व झज्जर का इतिहास अंकित किया जाएगा। मकबरों को देखने के लिए पर्यटकों के लिए पुरातत्व विभाग टिकट भी रखेगा। जो ऑनलाइन लेने पर बीस रुपये व आफलाइन लेने पर 25 रुपये की लगेगी।
झज्जर के मकबराें का इतिहास...
इतिहासकार यशपाल गुलिया ने बताया कि शहर के पूर्व में कुछ भव्य मकबरे निर्मित हैं। जिनका निर्माण यहां के कलाल शासकों ने किया था। लगभग 400 वर्ष पूर्व निर्मित इन मकबरों की निर्माण शैली भी अद्वितीय है। मुगल काल में जहांगीर बादशाह ने अपने चौबदार हाजिर रखा कलाल को सिकंदरपुर क्षेत्र प्रदान किया था। उसके बाद कलाल कबीले के शासकों ने झज्जर को मुख्यालय बनाकर लगभग 100 वर्षों सन 1720 तक शासन किया और उस अवधि में विशेष जमीनी पत्थर द्वारा इन भव्य मकबरों का निर्माण किया था। उनमें प्रमुख बुआ कलाल के मंगेतर हसन शहीद का मकबरा भी है। उसके साथ दूसरा भव्य मकबरा फकीर अब्दुस समद खां का है। उन्होंने बताया कि हसन शहीद का मकबरा 1625 में बनाया गया था। अन्य मकबरों को 1629 में निर्मित कलाल खा का मकबरा है। प्राय सभी मकबरों में फारसी, अरबी भाषा में शिलालेख लगे हुए थे, जिनमें से अभी कुछ खंडित अवस्था में ही उपलब्ध हैं। उसी परिसर में मुस्तफा कलाल शासक की पुत्री बुआ कलाल के नाम से एक बड़ा तालाब भी निर्मित है।
वर्जन:
पुरातत्व संरक्षण विभाग की ओर से मकबरों का सुंदरीकरण किया जा रहा है। करीब 11 मकबरों को प्राचीन स्वरूप दिया जाएगा।
दीपांशु वशिष्ठ, पुरातत्व संरक्षण विभाग, सूरजगढ़ (फरीदाबाद)