झज्जर। अनाज मंडियों में खरीदा जा रहा गेहूं सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को राशन डिपो के माध्यम वितरित किया जाता है। लेकिन इन दिनों बारिश के कारण अनाज मंडियों में खरीदा गया और बिना खरीदा अनाज खुले में पड़ा है। बुधवार की शाम को हुई बारिश के कारण गरीबों का निवाला बनने वाला हजारों एमटी अनाज भीग गया है और सुखाने के लिए जगह न होने के कारण ढेरों के नीचे का गेहूं भीने के कारण सड़ने लगेगा। क्योंकि भीगे हुए गेहूं को सुखाने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है। क्योंकि मंडियों में गेहूं के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। आढ़ती और मजदूर गेहूं और सरसों के ढेरों के आसपास भरे पानी को निकालने में जुटे हुए थे। जिले की कच्ची मंडियों में और भी बुरा हाल है। ढाकला, माजरा डी और छारा की मंडियां कच्ची हैं। इसके अलावा मातनहेल की मंडी भी आधी कच्ची पड़ी है। इन मंडियों में तो अनाज के ढेरों के नीचे पानी घुसने के कारण अनाज और जल्दी खराब हो जाता है। हालांकि खरीद एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि वे खराब हुए अनाज को नहीं खरीदेंगे। क्योंकि गोदाम पर खराब अनाज को गुणवत्ता को देखते हुए रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
बारिश में 50 प्रतिशत अनाज भीगा
जिले की अनाज मंडियों की बात की जाए तो करोड़ों रुपये का अनाज बारिश में भीग गया है। सरकार की तरफ से 4200 रुपये प्रति क्विंटल सरसों और 1840 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। जिले की अनाज मंडियों में बुधवार की देर शाम तक करीब एक लाख 33 हजार क्विंटल गेहूं खरीदा गया है और करीब दो लाख 70 हजार क्विंटल सरसों खरीदी गई है। सरसों में से 30 प्रतिशत और गेहूं में से करीब 90 प्रतिशत अनाज मंडियों में पड़ा
है। इसमें से करीब 50 प्रतिशत अनाज बारिश से भीगा है। अगर समय पर अनाज का उठान हो जाता तो काफी हद तक अनाज को भीगने से बचाया जा सकता था। इसके अलावा बिना खरीदा गया गेहूं और सरसों भी अनाज
मंडियों में भीगा है।
अगर अनाज का समय पर उठान हो जाता तो नुकसान को कम किया जा सकता था। आढ़तियों ने अनाज को बेशक ऊपर से ढक दिया हो, लेकिन ढेरों के नीचे करीब एक से डेढ़ फुट तक अनाज भीग गया है। जो खराब होने के कारण रिजेक्ट हो जाएगा। ऐसी स्थिति में आढ़तियों और किसानों को ही नुकसान होगा। अगर सरसों का भी उठान पूरा हो जाता तो मामला कुछ हद तक काबू में आ जाता। अतिरिक्त मुख्य सचिव के दौरे के बाद भी अनाज के उठान में तेजी नहीं आई है। मंडी पूरी तरह भरने वाली है। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी भी जिन आढ़तियों के पास सरसों अधिक है उनके कागज कम पास कर रहे हैं।
चांद सिंह पहलवान, प्रधान, अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन, झज्जर।
खराब हुए अनाज को न तारे गोदाम पर लिया जाएगा और न ही खरीदा जाएगा। अनाज को भीगने से बचाने की जिम्मेदारी आढ़तियों की है।
देवेंद्र सिंह, डीएम हैफेड, रोहतक।