फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेना ने अपनी 130 साल पुरानी जमीन वे हटवाए अवैध कब्जे

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

बहादुरगढ़। भारतीय सेना के जवानों ने वीरवार को पुराने लघु सचिवालय के पास स्थित अपनी 130 साल पुरानी जमीन से कब्जे हटवा दिए। यहां से अस्थायी कब्जों को ढहा दिया गया और सरसों की फसल को काट को हटा दिया गया। कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस प्रशासन का पूरा अमला तैनात रहा। सेना और पुलिस की तैनाती के कारण लोग कार्रवाई का विरोध नहीं कर सके। दरअसल, पुराने लघु सचिवालय से झज्जर रोड की ओर जाने वाले रास्ते के पास सेना की करीब 12 एकड़ जमीन है। इनमें से 9 एकड़ जमीन लीज पर दी गई थी। वर्ष 2015 में लीज पूरी हो गई थी। लीज पूरी होने के बावजूद चार साल बाद भी यह जमीन नहीं छोड़ी गई। जमीन पर खेती, नर्सरी और टेनिस एकेडमी चल रही थी। वीरवार की सुबह करीब दस बजे हिसार से सेना के जवान बहादुरगढ़ में पहुंचे। इसके साथ ही सिटी, सेक्टर-छह थाना सहित काफी पुलिस बल व स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी आर्मी के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान सेना के अधिकारियों ने लोगों को अपना सामान हटाने की कुछ देर की मोहलत दी। इसके बाद दोपहर डेढ़ बजे जेसीबी के जरिये कब्जे ढहाने शुरू कर दिए। कार्रवाई पूरी होने के बाद शाम को आर्मी वापस लौट गई।

1890 में मिली थी आर्मी को जमीन
दरअसल, सेना के जवानों को ठहरने के लिए हर जिले में आर्मी को जमीन दी गई है। वर्ष 1890 में आर्मी को ठहरने के लिए बहादुरगढ़ में भी कोर्ट के पास जमीन दी गई थी। उस दौरान यहां खाली ग्राउंड होता था। आर्मी दूर-दराज से अपने गंतव्य के लिए निकलती थी तो यहां विश्राम के लिए रुकती थी। इसके बाद यह जमीन पट्टे पर दी जाने लगी और यहां खेती होने गई। वर्ष-2013 में साढ़े 4 एकड़ जमीन माजरी के धर्म सिंह को व साढ़े चार एकड़ जमीन खरहर की बाला को लीज पर दी गई, लेकिन 2015 में लीज खत्म कर दी गई। लीज खत्म होने के बाद भी यह जमीन खाली नहीं हो सकी। कुछ क्षेत्र में खेती और नर्सरी चलती रही, तो कुछ हिस्से में करीब दो साल पहले खेल एकेडमी खोल दी गई। एक कमरा भी यहां बना हुआ था। बताते हैं कि इन लोगों को आर्मी की ओर से पहले कई बार कब्जा छोड़ने की हिदायत दी गई थी। कब्जे नहीं छोड़े गए तो वीरवार को आर्मी ने खुद आकर कब्जे हटवा दिए।
विज्ञापन


थाना, धर्मशाला और सरकारी दफ्तर भी जद में
मौके पर पहुंचे सेना अधिकारी के कहा कि एक पुलिस थाना, छोटूराम धर्मशाला व नगर परिषद दफ्तर भी इस जमीन की जद में है। इस संबंध में सरकार से बात चल रही है। असल में सेना इस जमीन को सरकार से बदलकर कहीं और लेना चाहती है, इस संबंध में हरियाणा सरकार से बातचीत चल रही है। जो भवन बने हैं, उसे तो सरकार ही देखेगी।

सात साल के लिए ली थी लीज पर, 2015 में नहीं की रिन्यू
धर्म सिंह ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2013 में साढ़े चार एकड़ जमीन सात साल के लिए लीज पर ली थी, लेकिन वर्ष 2015 में लीज समाप्त कर दी गई। लीज रिन्यू नहीं हुई तो उन्होंने अपनी एफडी वापस करने की मांग की लेकिन एफडी वापस नहीं ली। उन्हें जमीन छोड़ने में कोई एतराज नहीं। यदि आर्मी यहां अपना स्कूल या कुछ अन्य निर्माण करती है तो वे सहयोग के लिए चंदा भी देंगे, क्योंकि वह खुद फौजी रहे हैं।
विज्ञापन


एकेडमी में चल रहा था टूर्नामेंट
इस जमीन पर कुछ हिस्से में टेनिस एकेडमी चल रही थी। इन दिनों एकेडमी में ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन की ओर से रैंकिंग टूर्नामेंट आयोजित किया गया था। यहां हरियाणा व दिल्ली सहित अन्य जगहों से खिलाड़ी खेलने आए थे। एकाएक आर्मी और पुलिस के पहुंचने से ये खिलाड़ी भी हैरान हो गए। कुछ खिलाड़ियों ने पुलिस व आर्मी अधिकारियों से कहा कि उनका टूर्नामेंट चल रहा है, पूरा होने दो। चाहे दो दिन बाद बेशक कब्जे हटा लेना। इसके बाद सभी खिलाड़ी वापस लौट गए।

आर्मी की जमीन थी। मंजूरी लेने के बाद आर्मी ने अपनी जमीन से कब्जे हटा दिए। कब्जे हटाने की कार्रवाई पूरी तरह से शांतिपूर्वक हुई।
बंसीलाल, तहसीलदार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट, बहादुरगढ़।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें