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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की जमीन बचाने का विकल्प मिला

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अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। शहर के दिल्ली रोड स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के राष्ट्रीय राजमार्ग-158 ए सिक्स लेन के अधिग्रहण के दायरे में आने के बाद विभाग ने स्टोरेज टैंक को बचाने का विकल्प तलाश लिया है। विभाग की प्लानिंग मुताबिक एसटीपी जोहड़ के ऊपर फ्लाईओवर बनेगा। इससे एसटीपी की जमीन सिक्स लेन में आने से बच जाएगी और सिस्टम पूरी तरह वर्किंग में रहेगा। हालांकि सीवरेज पानी स्टोरेज जोहड़ के लिए पहले से ही जगह की कमी बनी हुई है।
चरखी दादरी जिले के कई गांवों से राष्ट्रीय राजमार्ग-158 सिक्स लेन गुजरेगा। इसके लिए इन गांवों के लोग तीन से चार करोड़ प्रति एकड़ जमीन का मुआवजा दिए जाने की मंाग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं। नारनौल प्रमुख सड़क मार्ग से यह सिक्स लेन रामनगर-कपूरी, टिकान कलां, ढाणी फौगाट, समसपुर, झिंझर, रानीला व बौंद कलां होते भिवानी-रोहतक मार्ग पर खैरड़ी मोड़ से लिंक होना है। इसके लिए जगह एवं निशानदेही को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इस राजमार्ग की जमीन की सतह से करीब 12 से 15 फीट तक ऊंचाई किए जाने की प्लानिंग है। शहर के लिए बना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ढाणी फौगाट गांव की सीमा में बना है। अब जो निशानदेही की गई है उसके अनुसार राजमार्ग एसटीपी के एक जोहड़ के बीच से गुजरना है। करीब एक एकड़ की चौड़ाई राजमार्ग में कवर होनी है। इसके बाद से ही जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारियों ने चिंतन शुरू कर दिया था क्योकि पहले ही शहर में सीवरेज व्यवस्था चौपट पड़ी है। अब यह स्टोरेज जोहड़ अधिग्रहण के दायरे में आने पर दूषित पानी स्टोरेज करने के लिए समस्या पैदा होना स्वाभाविक हो गया था। पहले ही यह जोहड़ छोटा होने की वजह से ओवरफ्लो बना रहता है जिससे शहर से दूषित पानी का समायोजन नहीं हो पा रहा है। सीवरेज समस्या को लेकर समय- समय पर शहर के पार्षद भी आवाज उठाते रहे हैं। सीवरेज लाइनें ब्लॉकेज बनी रहती है जिससे सड़कों व गलियों मेें दूषित पानी का जमाव बना रहता है। पहले ही यह जोहड़ काफी छोटा पड़ता है। एसटीपी जोहड़ की जमीन अधिग्रहण में चले जाने को लेकर विभाग अधिकारियों ने संबंधित उच्चाधिकारियों से संपर्क शुरू कर दिया था ताकि इसका कोई विकल्प तलाशा जा सके।
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किसान कर रहे एसटीपी के पानी को ड्रेन में डालने की मांग
क्षेत्र में जलभराव की ज्यादा समस्या होने की वजह से आम लोग व आसपास के किसान इस एसटीपी के यहां होने से नाखुश हैं क्योंकि एसटीपी समय- समय पर ओवरफ्लो बना रहता है और दूषित पानी का खेतों में जमाव बना रहता है जिससे खेती में भारी नुकसान होता है। अधिकतर किसानों का मानना है कि एसटीपी के पानी को या तो पाइप लाइन बिछाकर किसी ड्रेन में डाला जाए या यह एसटीपी किसी दूसरी जगह पर डिजर्ट एरिया में बना दिया जाए तभी इस समस्या का स्थाई समाधान संभव है।
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विभाग की इस बारे में राजमार्ग का निर्माण करनेे वाली एजेंसी के अधिकारियों से बात हुई है। एसटीपी के साथ में फ्लाइओवर बनाए जाने की प्लानिंग है इससे एसटीपी की काफी हद तक जमीन राजमार्ग से बच जाएगी।
लोकेश कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग
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