अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-152 डी में जिले के 18 गांवों की 303 हेक्टेयर क्षेत्र भूमि शामिल की जाएगी। इसके तहत करीब 2975 पेड़ भी काटे जाएंगे। इससे भूमि क्षरण (कटाव) का अंदेशा है। हालांकि इसके बदले ग्रीन बेल्ट पर सरकार द्वारा 1.36 लाख पौधे लगाने की प्लानिंग भी तैयार है। राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-52डी निर्माण के लिए सभी आवश्यक सर्वे रिपोर्ट तैयार हो चुकी हैं। यह सड़क परियोजना 230 किलोमीटर लंबी है जो गंगहेड़ी से नारनौल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी, रोहतक व चरखी दादरी सहित आठ जिलों की सीमा से गुजरेगा। इस पर 150 अंडरपास और सात आरओबी भी बनाए जाने प्रस्तावित हैं।
17 दिसंबर को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक में इस परियोजना पर किसानों से प्रदूषण संबंधी सुझाव मांगे जा चुके हैं। वायु प्रदूषण की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर सरकार ने इस सड़क परियोजना का नाम ग्रीन बेल्ट का रूप दिया हैै। इस 4/6 लेन सड़क मार्ग के दोनो ओर पेड़ लगाए जाएंगे ताकि प्रदूषण का स्तर न बढ़ने पाए। इस परियोजना के लिए कुल 1826.05 हेक्टेयर क्षेत्र जमीन की जरूरत है जिसमें चरखी दादरी जिले की 303.4026 हेक्टेयर क्षेत्र जमीन भी शामिल हैै। जिले के 18 गांवों की जमीन इस परियोजना में शामिल की गई है। जिले के उत्तरी छोर से दक्षिणी दिशा में यह मार्ग बनना है। इस परियोजना में 1696.05 हेक्टेयर जमीन प्राइवेट और 64.42 हेक्टेयर जमीन सरकारी शामिल है। चरखी दादरी जिले का दिल्ली बाईपास स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के स्टोरेज टैंक भी इसकी चपेट में आएंगे।
40 लाइट वाहन अंडरपास बनेंगे
इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर 40 लाइट वाहन अंडरपास और 110 छोटे वाहन अंडरपास बनाए जाने हैं। इसके अलावा सात आरओबी भी बनने प्रस्तावित हैं। इस सड़क मार्ग के दोनो ओर एक लाख 36 हजार 200 पौधे लगाए जाएंगे ताकि पर्यावरण को हरा- भरा बनाया जा सके। इस सड़क मार्ग के दोनो ओर 500 मीटर एरिया को कवर किया जाएगा। इस परियोजना की सर्वे अनुसार 15 स्थानों पर परिवेश शोर का आंकलन किया गया जिसमें जींद, चरखी दादरी, और महेंद्रगढ़ जिलों में यातायात व भारी वाहनों के कारण शोर का स्तर अधिक पाया गया है।
क्रॉस ड्रेनेज संरचनाओं का डिजाइन किया शामिल
इस परियोजना से स्थानीय जल आपूर्ति स्रोतों जैसे नलकूप, तालाब, कुएं और पानी के टैंकों पर आंशिक प्रभाव पड़ेगा लेकिन सरकार इन जल स्रोतों की प्रतिस्थापना करने की प्लान पर भी साथ- साथ काम कर रही है। सड़क डिजाइन से पानी निकासी के लिए ड्रेनेज का विशेष ध्यान रखा गया है। डिजाइन में क्रॉस ड्रेनेज संरचनाओं का डिजाइन शामिल किया गया ताकि पानी के तेज प्रवाह को रोका जा सके। इस परियोजना के लिए की गई सर्व रिपोर्ट के अनुसार यह नई हाईवे परियोजना है जिससे वाहन उत्सर्जन के साथ हवा और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि का कारण बन सकता है। सड़क के किनारे वनस्पति को हटाने से भूमि का क्षरण होने का भारी अंदेशा है। इस परियोजना से कुल 15 हजार 500 केएलडी पानी की खपत होगी। इस परियोजना के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है।