झज्जर। सर्दी का मौसम शुरू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग मच्छर जनित बीमारियों को लेकर राहत की सांस लेता है। लेकिन इस बार दो माह में डेंगू के मरीजों में बढ़ोतरी हुई है। अक्तूबर व नवंबर में 420 डेंगू संभावित मरीज पाए हैं। इनमें से एलिजा जांच के दौरान 36 मरीज डेंगू पॉजिटिव पाए गए हैं। जबकि अब तक के आंकड़ों को देखा जाए तो जिला में अब तक 606 डेंगू संभावित मरीज मिले हैं और इन में 42 मरीज डेंगू पॉजिटिव पाए जा चुके हैं।
विभाग के सितंबर तक के आंकड़ों को देखा जाए तो 279 डेंगू संभावित मरीज मिले थे। जिनमें से 6 मरीज डेंगू पॉजिटिव पाए गए थे। सितंबर में हुई बरसात के बाद मच्छरों ने अपना प्रकोप दिखाया और डेंगू के मरीजों में बढ़ोतरी होती गई। इस बार झज्जर शहर में भी डेंगू का प्रकोप दिखाई दिया और यहां पर भी दस मरीज डेंगू पॉजिटिव पाए गए है। जबकि बहादुरगढ़ में सबसे अधिक केस मिले हैं। यहां पर 24 मरीज डेंगू पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। वहीं जैतपुर गांव के एक डेंगू संभावित मरीज की मौत भी हो चुकी है। इनके अलावा जैतपुर, जौंधी, परनाला, मांडोठी में एक-एक औ छुड़ानी गांव में दो डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस साल डेंगू के मरीजों में 62 फीसद की कमी आई है। पिछले साल जिला भर में 111 मरीज डेंगू पॉजिटिव पाए गए थे।
ग्राम पंचायतों के पास नहीं पर्याप्त संसाधन
जिला में डेंगू चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज मच्छर पर काबू पाने के लिए ग्राम पंचायतों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। जबकि फोगिंग की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से ग्राम पंचायतों को दी गई है। झज्जर जिला की बात की जाए तो अब तक 250 में से मात्र 50 ग्राम पंचायतों के पास ही फोगिंग मशीन हैं। जबकि बजट की कमी के कारण 200 ग्राम पंचायतों ने अभी तक फोगिंग मशीनें नहीं खरीदी हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग की तरफ ग्राम पंचायतों को फोगिंग मशीनें खरीदने के लिए हर साल पत्र जारी किए जा रहे हैं। फोगिंग के लिए विभाग की तरफ से कैमिकल ही ग्राम पंचायतों को दिया जाता है। बाकी फोगिंग पर होने वाला खर्च भी ग्राम पंचायतों को वहन करना पड़ता है। जबकि मलेरिया के 68 मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ सेजिला में करवाए जा रहे सर्वे के दौरान एडीज मच्छर का लारवा पाए जाने पर करीब 8000 लोगों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
-फोगिंग मशीन चलाने वाला व्यक्ति भी करते हैं हायर
जिला में फोगिंग और मास सर्वे का कार्य जारी है। ग्राम पंचायतों को फोगिंग मशीन को चला कर फोगिंग का कार्य करने वाला व्यक्ति भी उन्हें हायर करना पड़ता है। क्योंकि ग्रामीणों को फोगिंग करने का पता नही होता। इसका खर्च भी ग्राम पंचायतों को देना पड़ता है। जबकि शहरी क्षेत्र में फोगिंग की जिम्मेदारी नगर पालिका और नगर परिषद की है। शहरी क्षेत्र में फोगिंग के कार्य पर होने वाला खर्च नगर पालिका और नगर परिषद को वहन करना होता है।
वर्जन
फिलहाल स्थिति पूरी तरह काबू में है। पिछले साल से डेंगू और मलेरिया के मरीजों में काफी कमी आई है। फोगिंग और सर्वे का कार्य अभी भी जारी है। अब मौसम में ठंडक घुल चुकी है और मच्छर का प्रकोप कम हो गया है।
- डॉ. कुलदीप, डीएमओ, झज्जर।