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झज्जर जिले से पहली शतरंज कोच बनी कोमल दहिया 22-56-55

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
कुश्ती, कबड्डी का गढ़ कहलाने वाले झज्जर जिले में दिमागी खेल शतरंज भी पांव जमा रहा है। हाल ही में मोहाली में हुए फिडे ट्रेनी सेमिनार में झज्जर जिले की बेटी कोमल दहिया ने परीक्षा पास कर नेशनल इंस्ट्रक्टर (कोच) का पद हासिल किया है। कोमल झज्जर जिले की ओर से बनने वाली पहली कोच है। उसकी उपलब्धि पर परिजनों व शतरंज प्रेमियों ने खुशी जताई है।
धर्मपुरा कॉलोनी (बहादुरगढ़) की निवासी कोमल दहिया (21) बीते चार वर्षों से शतरंज खेल रही है। इस दौरान वह डिस्ट्रिक से लेकर नेशनल तक कई जीत दर्ज कर चुकी है। इसी कड़ी में एक कदम और आगे बढ़ते हुए कोमल अब नेशनल इंस्ट्रक्टर और आर्बिटर (रेफरी) बन गई है। दरअसल, वर्ल्ड चेस फेडरेशन (फिडे) एवं ऑल इंडिया चेस फेडरेशन की ओर से गत 4 से 6 मार्च को मोहाली में फिडे ट्रेनी सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें सात राज्यों के प्रतिभागियों ने भाग लिया। हरियाणा से पांच प्रतिभागी थे। इस पांच सदस्यीय दल में बहादुरगढ़ की कोमल दहिया भी शामिल थी। कोमल ने अद्भुत कौशल का परिचय देकर नेशनल इंस्ट्रक्टर (एनआई) की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके उपरांत मनाली (हिमाचल) में 9 से 11 मार्च तक हुए फिडे आर्बिटर कोर्स में परीक्षा दी।
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कोमल ने 80 फीसद से अधिक अंक लेकर आर्बिटर (रेफरी) की परीक्षा पास की। कोमल ने एनआई बनकर झज्जर जिले का मान बढ़ाया है। वह झज्जर जिले से मान्यता प्राप्त करने वाली पहली कोच है। कोमल दहिया दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमएससी कर रही हैं।
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शतरंज को नई पहचान दिलाउंगी : कोमल
कोमल ने अपनी सफलता का श्रेय परिजनों को दिया। उन्होंने कहा कि शतरंज न केवल खेल बल्कि हमारी प्राचीन संस्कृति का हिस्सा है। इससे बुद्धि तीव्र होती है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। झज्जर जिले में यह खेल लोकप्रिय नहीं है। जिले में शतरंज को नई पहचान दिलाना और प्रतिभाओं का निखारना ही उसका प्रयास रहेगा।
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