अब मिड-डे मील में बच्चों को मिलेगा पांच फ्लेवर का दूध
चरखी दादरी।
अब स्कूलों में बच्चे मिड-डे-मील में पौष्टिक भोजन के रूप में पांच फ्लेवर का दूध पी सकेंगे। ये दूध प्रति बालक 200 मिलीग्राम दिया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग स्कूलों में सूखा पाउडर उपलब्ध करवाएगा। इससे पहले प्राइमरी स्कूल के बच्चों की संख्या भेजने के चार माह बाद भी मिड-डे-मील में बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा था। इसके अलावा जुलाई माह में हर साल बढ़ने वाले सात प्रतिशत प्रति बालक बजट अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। फिलहाल बच्चों को दो दिन चावल और दो दिन गेहूं से बने व्यंजन खिलाए जा रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार आज देश का हर तीसरा बालक कुपोषण का शिकार है। मौलिक शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत कक्षा छह से आठवीं तक बच्चों को फ्री व अनिवार्य रूप से शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान है। पुस्तकें ,वर्दी और दोपहर का भोजन फ्री में दिए जाने की व्यवस्था है। विभाग ने कक्षा आठवीं तक बच्चों को दो वर्गों में बांटा हुआ है। एक प्राइमरी वर्ग व दूसरा अपर प्राइमरी वर्ग है इन दोनों वर्गों की श्रेणियों के बच्चों के लिए दोपहर के भोजन का खर्च सरकार की ओर से वहन किया जाता है। प्राइमरी व अपर प्राइमरी के बच्चों के लिए प्रति बालक अलग-अलग खर्च करने का प्रावधान है।
इस समय स्कूलों में दोपहर के भोजन में चार दिन चावल व दो गेहूं से बने व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इन व्यंजनों में मूंग-चावल की खिचड़ी के अलावा नमकीन चावल, चावल-चना खिचड़ी, सब्जी रोटी, दाल रोटी, सादा पका हुआ चावल ज्यादा मात्रा में खिलाया जा रहा है। दोपहर के भोजन में कुल 16 प्रकार के व्यंजन शामिल हैं जो प्रत्येक दिन के लिए अलग-अलग रूप में हैं।
--पिछले करीब चार माह पहले सरकार व विभाग ने दोपहर के भोजन में दूध को शामिल करने की बात कही थी। विभाग अधिकारियों का तर्क था कि बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले ऐसे में दूध को शामिल करना जरूरी है। दूध में व्याप्त पोषक तत्वों से बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास जल्द होता है। कुषोषण से बचाने में दूध काफी गुणकारी साबित होता है। दूध में प्रोटीन के अलावा, कैल्शियम, मैग्नीशियम,पोटाशियम,वसा, विटामिन के अन्य स्रोत प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। अब सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए पांच फ्लेवर का दूध सूखा पाउडर के रूप मेें भेजा जाएगा। इस सूखे दूध में इलायची, स्ट्राबेरी, चॉकलेट, रोज फ्लोर व पाइन एप्पल के फ्लेवर शामिल होंगे। इस पाउडर को गुनगुने पानी में मिलाकर इसका दूध तैयार किया जाएगा। विभाग की प्लान के अनुसार प्रत्येक बच्चे को 200 मिलीग्राम दूध मिलेगा ताकि उसका शारीरिक व मानसिक विकास हो सके। इस दूध को तैयार करने के लिए विधि भी मिड-डे-मील इंचार्ज को बता दी गई है। इसी माह के अंत तक बच्चों को यह दूध मिलना शुरू होने की उम्मीद है।
बजट में प्रतिवर्ष की 7 प्रतिशत बढ़ोतरी आज तक नहीं हुई
इस समय प्राइमरी स्कूल के प्रत्येक बच्चे पर दोपहर के भोजन पर 4.13 रुपये खर्च किया जा रहा है जबकि अपर प्राइमरी यानी कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चे पर 6.18 रुपये खर्च किया जा रहा है। चावल, दाल व गेहूं इस खर्च राशि में शामिल नहीं हैं। सरकार इस खर्च राशि में हर साल सात प्रतिशत बढ़ोतरी करती है। ये बढ़ोतरी जुलाई में की जाती है लेकिन इस बार प्रति बालक खर्च में यह बढ़ोतरी भी नहीं की गई है। बजट खर्च में बढ़ोतरी न होने से स्कूलों में मिड-डे-मिल का काम संभाल रहे इंचार्ज के समक्ष सभी बच्चों के लिए भोजन की पूर्ति करना मुश्किल बना हुआ है। राजकीय स्कूल के एक मिड-डे-मिल इंचार्ज ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि हर साल महंगाई के अनुपात में प्रति बालक लागत खर्च को बढ़ाया जाना जरूरी है। वहीं प्रत्येक बच्चे को भरपेट भोजन खिलाया जाना भी जरूरी है।
मिड-डे-मील में अब बच्चों को जल्द ही दूध मिलना शुरू हो जाएगा। दूध पांच फ्लेवर में होगा। इसके लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग भी जा चुकी है। इससे काफी हद तक बच्चों में कुपोषण की समस्या से भी छुटकारा मिल सकेगा।
कुलदीप सिंह,बीईईओ