अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
रोडवेज यूनियनों ने बुधवार को सुबह 9 बजे रोडवेज बसों का चक्का जाम कर दिया। चक्का जाम दो घंटे के लिए था, जोकि 11 बजे तक रहा। यूनियनों के पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने इस दौरान बसों को वर्कशाप में खड़ी कर डिपो परिसर में धरना दिया। धरने के दौरान रोडवेज यूनियनों के पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं, रोडवेज यूनियनों के नेताओं ने इस दौरान निजी बसों को भी डिपो परिसर से बाहर कर दिया। चक्का जाम व धरने को रोडवेज विभाग की सभी यूनियनों का समर्थन हासिल था, जिसके चलते दो घंटे तक पूर्णतया से रोडवेज का चक्का जाम रहा। चक्का जाम के दौरान अधिकारियों ने हालात पर पल-पल नजर जमाए रखी।
ये है कर्मियों की मांग
रोडवेज कर्मचारी निजी परमिटों का विरोध कर रहे हैं। वहीं कुछ डिपो में टाइम टेबल का भी विवाद चल रहा है। रोडवेज यूूनियनों का आरोप है कि अधिकारी रोडवेज के टाइम खत्म कर निजी समितियों को फायदा पहुंचा रहे हैं। जिससे रोडवेज घाटे में जा रही है और जनता में संदेश दिया जा रहा है कि कर्मचारियों की वजह से ऐसा हो रहा है। रोडवेज के कर्मचारी बैक डोर परमिट का विरोध कर रहे हैं।
अब छह नवंबर को होगा फैसला
बुधवार को दो घंटे का चक्का जाम सफल होने के बाद यूनियनों के द्वारा फैसला किया गया कि आगामी छह नवंबर को सभी यूनियनों की प्रदेश स्तरीय बैठक भिवानी में होगी। जहां पर आगामी आंदोलन के बारे में फैसला लिया जाएगा। बुधवार को चक्का जाम व धरना-प्रदर्शन में एसकेएस के विजय माजरा, अशोक शर्मा, बीएमएस के सुरेश पलड़ा, इंटक के कृष्ण, रामबीर सिंह सहित सभी यूनियनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
यात्रियों को हुई परेशानी
रोडवेज यूनियनों की हड़ताल के चलते यात्री काफी परेशान रहे। वैसे तो यूनियनों ने स्कूल-कॉलेजों के छात्रों को परेशानी से बचाने लिए चक्का जाम का फैसला 9 बजे करने का रखा था। लेकिन यात्रियों को इस दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरे जिलों व ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों को चक्का जाम होने की जानकारी न होने के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ी। वहीं इस दौरान निजी समितियों की बसों ने बस स्टैंड के गेट से ही अपने रूटों को चलाया तथा इस दौरान जमकर चांदी कूटी।