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Hisar News: स्कॉर्पियो से 100 मीटर घसीटने की आरोपी युवती को दूसरी बार भी जमानत नहीं

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हिसार। डाबड़ा चौक के पास स्कॉर्पियो से दो बाइक सवारों को टक्कर मारने और हादसे के बाद उन्हें करीब 100 मीटर तक घसीटने की आरोपी 23 वर्षीय पारुल को अदालत से दूसरी बार भी राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुनीत सहगल की अदालत ने उसकी दूसरी नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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अदालत ने मामले के तथ्यों को गंभीर मानते हुए कहा कि प्रथमदृष्टया यह मामला केवल वाहन चलाने में लापरवाही तक सीमित नहीं लगता। पुलिस के अनुसार इसी साल 14 मई को डाबड़ा चौक के पास तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने दो मोटरसाइकिलों को पीछे से टक्कर मारी थी। हादसे के बाद दोनों बाइक सवार स्कॉर्पियो के साथ करीब 100 मीटर तक घसीटते हुए गए। इसके बाद चालक मौके से फरार हो गया। इस कारण मामले में हिट एंड रन का पहलू भी सामने आया।
हादसे में सचिन की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र ने उपचार के दौरान 22 मई को दम तोड़ दिया। सचिन के भाई जयप्रकाश ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने डाबड़ा चौक के पास दोनों मोटरसाइकिलों को पीछे से टक्कर मारी थी।
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मौके से मिली थी स्कॉर्पियो की नंबर प्लेट और ग्रिल
डाबड़ा चौक के पास हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। वहां से दो क्षतिग्रस्त मोटरसाइकिलों के अलावा स्कॉर्पियो की टूटी नंबर प्लेट, महिंद्रा का लोगो और क्षतिग्रस्त ग्रिल बरामद हुई। जांच के दौरान पुलिस ने वाहन मालिक से पूछताछ की और पारुल को चालक के तौर पर चिह्नित किया। पुलिस ने मामले में सीसीटीवी फुटेज जुटाए, वाहनों की जांच कराई और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी हासिल किए। जांच के बाद पारुल को 19 मई को गिरफ्तार किया गया। उस पर बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने का भी आरोप है।
पहली जमानत 30 मई को खारिज, हाईकोर्ट से अर्जी वापस
दूसरी नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि पारुल शहर की रहने वाली है और मामले की जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। पुलिस और शिकायतकर्ता पक्ष ने जमानत का विरोध किया। पारुल की पहली नियमित जमानत अर्जी 30 मई को इसी अदालत ने खारिज कर दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट में दायर जमानत अर्जी 16 जून को वापस ले ली गई थी। अब अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुनीत सहगल की अदालत ने दूसरी नियमित जमानत अर्जी भी खारिज कर दी।
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