हिसार। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 10 जुलाई को श्रद्धा और भक्ति के साथ रखा जाएगा। सनातन धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के पालन से पापों का क्षय होता है तथा सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शिव मंदिर के पंडित श्याम ने बताया कि योगिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे पूर्व में किए पापों से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पंचामृत व गंगाजल से अभिषेक कर पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ और मंत्र जाप का भी विशेष महत्व है। व्रत के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाने, भजन-कीर्तन करने तथा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल या दक्षिणा का दान करने का विशेष फल बताया गया है।
11 जुलाई को होगा पारण
योगिनी एकादशी व्रत का पारण 11 जुलाई को सुबह 5:49 बजे से 8:39 बजे के बीच करना शुभ रहेगा। द्वादशी तिथि के भीतर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के बाद व्रत का समापन कर सात्विक भोजन ग्रहण करने और दान-पुण्य की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार योगिनी एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं बल्कि आत्मसंयम, सदाचार और सेवा का संदेश देने वाला पावन अवसर भी है।