फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व मौसम विज्ञान दिवस : एक संदेश बचा देता है लाखों किसानों की सिंचाई और स्प्रे का खर्च

विज्ञापन
विज्ञापन
कड़ी धूप के बीच जब फसल सिंचाई मांगती है या बीमारी आने पर किसान स्प्रे की तैयारी करता है तो किसान के फोन पर संदेश आता है कि एक दिन बाद बारिश होने वाली है। संदेश पढ़कर किसान स्प्रे और सिंचाई रोक लेते हैं, तो उनका एक सिंचाई का खर्च बच जाता है। साथ ही नुकसान भी कम होता है।
विज्ञापन

स्प्रे नहीं करने से उसका हजारों का स्प्रे बच जाता है। तकनीक के जमाने में एडवांस हुए हमारे किसानों को फोन पर संदेश भेजने की यह सुविधा देता है चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय का कृषि मौसम विभाग। विवि में 1982 में स्थापित हुए इस विभाग ने वर्ष 2010 में किसानों के लिए संदेश सेवा शुरू की थी, जिसका लाभ हरियाणा और साथ लगते राजस्थान और पंजाब प्रांत के सीमाई क्षेत्रों के लगभग 5 लाख किसान भी उठा रहे हैं।
आंकड़े -
- एचएयू में 1982 मेें शुरू हुआ था कृषि मौसम विभाग।
- विभाग ने 1989 में अखबारों, टीवी व रेडियो के माध्यम से कृषि मौसम सेवाएं शुरू कीं।
- 2010 में मौसम संदेश सेवा शुरू की। 5 लाख किसानों तक पहुंच रहे मैसेज।
- 2016 में एचएयू व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से कृषि मौसम की जानकारी देनी शुरू की।
- 2019 में विवि ने फेसबुक पेज के माध्यम से मौसम सूचना सेवाएं आरंभ कीं।
- एचएयू की ई-मौसम एप 60 हजार किसान डाउनलोड कर चुके हैं।
60 हजार किसानों ने डाउनलोड किया ई-मौसम किसान एप
तकनीक के इस जमाने में हमारे किसान भी हाईटेक हो रहे हैैं। एक तरफ जहां एचएयू का कृषि मौसम विज्ञान विभाग किसानों को मोबाइल पर संदेश भेजकर मौसम की जानकारी उपलब्ध करवा रहा है तो वहीं, विभाग का ई-मौसम एचएयू के नाम से एप को भी 60 हजार किसानों ने डाउनलोड किया है। इस ई-मौसम एप पर किसान मौसम के अलावा कृषि संबंधी अन्य जानकारी भी हासिल कर रहे हैं। वहीं, विवि ने 2019 में ई-मौसम एचएयू का एक फेसबुक पेज बनाया, जिसका मकसद हर व्यक्ति तक मौसम की जानकारी पहुंचाना है।
विज्ञापन

व्हाट्सएप ग्रुप : ताकि भीगने से बच जाए फसल
एचएयू के कृषि मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. मदन खिचड़ ने बताया कि विभाग ने जनवरी 2016 में दो व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। इन ग्रुप में कृषि वैज्ञानिक, कृषि एंव मार्केटिंग विभाग के अधिकारी, प्रगतिशील किसानों को शामिल किया गया। ग्रुप में समय पर मौसम व बारिश की जानकारी मिलने से मंडी में गेहूं व अन्य फसलों को भीगने से बचाया जा सकता है। हालांकि इस सुविधा के बाद भी मंडियों में हर बार गेहूं की फसल भीग जाती है।
हमारा विभाग किसानों को समय पर सटीक जानकारी दे रहा है और किसान भी इसे पसंद कर रहे हैं। बल्कि किसान एचएयू के संदेश का इंतजार करते हैं, ताकि वे उसी के अनुसार खेत में पानी दे सकें। उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए मौसम की जानकारी सबसे महत्वपूर्ण है और इसकी जिम्मेदारी विभाग बखूबी निभा रहा है और किसान इसका फायदा उठा रहे हैं।
विज्ञापन

- प्रो. समर सिंह, कुलपति, एचएयू।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें