सुरेंद्र दलाल
हिसार। आप युवा हैं, लेकिन सेहत का ध्यान नहीं रख रहे। नियमित और संतुलित आहार को नजरअंदाज कर रहे हैं तो यह आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती है। प्रदेश में टीबी जांच में सबसे अधिक युवा इस बीमारी से ग्रसित पाए गए हैं। टीबी मुक्त हरियाणा अभियान के तहत वर्ष 2025 में निक्षय पोर्टल पर दर्ज 90 हजार रोगियों की जांच की गई। इनमें से 88418 में टीबी की पुष्टि हुई। इनमें 25-40 आयु वर्ग के लोगों की संख्या 60 फीसदी है। रोग की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले तीन साल में ही इस बीमारी से 9765 लोगों की मौत हो चुकी है।
साल 2025 में प्रदेश भर में टीबी से 3223 लोगों की मौत हो गई। सरकार का दावा है कि प्रदेश में 1855 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। निक्षय भारत तथा टीबी मुक्त हरियाणा अभियान के तहत वर्ष 2025 में 90 हजार रोगी पंजीकृत हुए। इनमें से 54013 पुरुष और 34405 महिलाएं टीबी ग्रस्त पाईं गईं। बच्चों (4846) का डाटा भी शामिल करें तो 57 प्रतिशत पुरुषों तथा 43 प्रतिशत महिलाओं में टीबी के लक्षण पाए गए। टीबी की जांच के लिए उन मरीजों पर फोकस किया गया जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है। इनमें एचआईवी/एड्स, मधुमेह, या कुपोषण से पीड़ित लोग शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने घनी आबादी वाले इलाकों में भी जांच की। गंदी, मलिन बस्तियों में और धूल वाले क्षेत्रों में सबसे अधिक सैंपल लिए गए। क्योंकि यहां रहने वाले लोगों में भी टीबी होने का खतरा ज्याद रहता है। इन इलाकों में जांच शिविर लगाए गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि वर्ष 2022 के बाद से तो प्रदेश में हर साल मौतों के आंकड़ों में वृद्धि दर्ज की गई है। चिकित्सक इसके पीछे समय पर जांच न करवाना, पुष्टि होने के बाद भी नियमित दवा न लेना आदि कारण मानते हैं।
प्रदेश में पिछले दस साल में टीबी से मौतें
वर्ष मौतें
2015 2572
2016 2550
2017 2370
2018 2460
2019 2311
2020 2222
2021 1802
2022 2415
2023 3148
2024 3294
2025 3323
(स्रोत: स्वास्थ्य विभाग)
किस आयु वर्ग के कितने मरीज
आयु वर्ग टीबी मरीज ( प्रतिशत में)
0 से 24 10
25 से 40 60
41 से 60 30
लक्षण दिखने पर भी नहीं कराते जांच
स्वास्थ्य विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 64 फीसदी लोग टीबी के लक्षण होने के बावजूद जांच नहीं करवाते। ऐसे लोग अस्पताल चले भी जाएं तो पूरा उपचार नहीं कराते। इनकी वजह से टीबी ज्यादा फैल रही है। एक मरीज 10 से 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसका बैक्टीरिया हर स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है। कम प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति बहुत जल्द इस रोग से ग्रसित हो जाते हैं।
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तीन साल में टीबी जांच का आंकड़ा
वर्ष जांच रोग की पुष्टि
2023 96000 78394
2024 95000 85710
2025 90000 88418
(स्रोत: स्वास्थ्य विभाग)
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क्या है टीबी
टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टिरियम ट्यूबरक्युलोसिस बैक्टीरिया से होती है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों में भी हो सकती है।
टीबी फैलने के कारण
- जब टीबी से पीड़ित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो हवा में बैक्टीरिया फैल जाते हैं। इन्हें सांस के साथ अंदर लेने से टीबी हो सकती है।
- जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें टीबी होने का खतरा ज्यादा होता है। कुपोषण, एचआईवी, डायबिटीज रोगियों के जल्द चपेट में लेती है।
- भीड़-भाड़ और खराब वेंटिलेशन वाले स्थान जैसे बंद कमरों, झुग्गियों में रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- टीबी मरीज के संपर्क में लंबे समय तक रहना, परिवार में या पड़ोस में किसी को टीबी होने पर खतरा ज्यादा होता है।
-टीबी के शुरुआती लक्षण
- दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी रहना।
- सूखी या बलगम वाली खांसी
- हल्का बुखार रहना खासकर शाम या रात में
- रात में पसीना आना
- बिना किसी कारण ज्यादा पसीना आना
- एकाएक वजन कम होना
- हमेशा थकान महसूस होना
- खांसी में खून आना (गंभीर स्थिति में)
टीबी की जांच कैसे होती है
1. मरीज के बलगम का सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है। इससे टीबी के बैक्टीरिया का पता चलता है।
2. छाती का एक्स-रे। इससे फेफड़ों में संक्रमण या दाग दिख जाते हैं।
3. हाथ की त्वचा में इंजेक्शन देकर टीबी संक्रमण की जांच की जा सकती है।
4.सीबीनेट टेस्ट: यह आधुनिक और सबसे सटीक टेस्ट है।
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टीबी मुक्त अभियान के तहत प्रदेश में वर्ष 2025 में 88418 लोगों में टीबी के लक्षण मिले। इन सभी लोगों का उपचार शुरू करा दिया है। टीबी की रोकथाम में हरियाणा का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। - डॉ. मनीष बंसल, स्वास्थ्य महानिदेशक, हरियाणा