इस बार का दक्षिण पश्चिम मानसून हरियाणा में असंतुलित रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, वर्तमान मानसून सत्र (1 जून से 20 अगस्त) के दौरान हरियाणा में बारिश का वितरण बेहद असंतुलित रहा है। राज्य में कुल संचयी वर्षा सामान्य से 17 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। 1 जून से 20 अगस्त के बीच प्रदेश में औसतन 254.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 307.6 मिमी रहता है। इस मानसूनी सीजन में हरियाणा के 22 जिलाें में से आठ जिलों में सूखे जैसे हालात हैं। आईएमडी के वैज्ञानिक शिवेंद्र सिंह ने बताया कि मानसूनी बारिश कुछ जिलों में अच्छी तो कुछ जिलों में कम हुई है। अक्सर सीजन में ऐसा देखा जाता है। इस बार पहले की तुलना में हरियाणा में मानसून कमजोर रहा है। इस कारण भी ऐसा देखने को मिला। अभी दक्षिण पश्चिम मानसून सितंबर के आखिर तक चलेगा।
22 में से आठ जिलों में सूखाग्रस्त हालात
इस मानसूनी सीजन में बारिश के आंकड़ों की तुलना से पता चलता है कि राज्य के 22 में से 8 जिलों में सूखाग्रस्त हालात बने हुए हैं। इनमें जींद 52% कमी, अंबाला में 51% कमी, कैथल में 49%, सिरसा में 47%, पंचकूला 44%, रोहतक में 36%, करनाल में 33% और सोनीपत में 27% बारिश की कमी शामिल हैं। जींद में सामान्य 276.4 मिमी के मुकाबले महज 133.9 मिमी और अंबाला में सामान्य 606.1 मिमी के मुकाबले मात्र 298.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
इन जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
वहीं दूसरी ओर, भिवानी में सामान्य से 22% अधिक (260.2 मिमी), कुरुक्षेत्र में 19% अधिक (342.1 मिमी) और पलवल में 17% अधिक (330.8 मिमी) वर्षा दर्ज हुई है। वहीं, यमुनानगर (564.1 मिमी), गुरुग्राम (341.7 मिमी), फरीदाबाद (365.5 मिमी) और नूंह (329.9 मिमी) में वर्षा की स्थिति सामान्य के करीब बनी हुई है। उत्तरी व मध्य हरियाणा के कृषि प्रधान जिलों में 50% तक बारिश की कमी के कारण धान और अन्य खरीफ फसलों की सिंचाई का संकट गहरा गया है, जिससे किसानों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।
बीते सप्ताह बारिश के हालात
बीते सप्ताह (14 से 20 अगस्त) की बात करें तो स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहां सामान्य 34.1 मिमी की जगह केवल 20.3 मिमी बारिश हुई, जो कि 40 प्रतिशत की भारी साप्ताहिक गिरावट को दिखाती है। इस दौरान पलवल 99% कम, रेवाड़ी में 97% कम, जींद में 95% कम, महेंद्रगढ़ 92% और सिरसा में 90% कमी के साथ मानसून लगभग सूखा ही बीता। हालांकि, चंडीगढ़ 108%, कुरुक्षेत्र में 177%, पंचकूला में 69% और पानीपत में 66% में बीते सप्ताह मानसूनी बौछारों के कारण अत्यधिक बारिश दर्ज की गई।