हिसार। सरकारी स्कूलों में दाखिला बढ़ाने के लिए सर्वे कर रहे शिक्षकों के पास अभिभावकों के सवालों के जवाब नहीं हैं। अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में छुट्टियां अधिक हो रही हैं, जबकि निजी स्कूल फिर भी ऑनलाइन कक्षाएं लगाते हैं। वहीं 55 फीसदी अभिभावक ऑनलाइन कक्षाओं से संतुष्ट नहीं हैं, उनका कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई न तो उन्हें समझ आ रही है, न ही बच्चों को। उन्होंने शिक्षकों को स्कूल खुलवाने की मांग की है।
अभिभावक-शिक्षकों की सीधी बात
अभिभावक : आपके सरकारी स्कूल में छुट्टियां अधिक होती है, इससे पढ़ाई खराब होती है?
शिक्षक : सरकार ही छुट्टियों पर फैसला करती है। इसमें शिक्षा विभाग कुछ नहीं कर सकता।
अभिभावक : ऑनलाइन कक्षाओं से हम संतुष्ट नहीं हैं, न हमें कुछ समझ आ रहा और न हमारे बच्चों को?
शिक्षक : कोरोना काल में स्कूल बंद हैं। इस स्थिति में ऑनलाइन कक्षाएं ही विकल्प हैं ताकि विद्यार्थियों का पढ़ाई से संपर्क बना रहे। हम अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं।
अभिभावक : आपके स्कूलों में सुविधाओं का अभाव है और छात्रवृत्तियां भी लटकी रहती है?
शिक्षक : सरकार इसके लिए तेेजी से कदम उठा रही है। नए शैक्षणिक स्तर में कई नए व पुराने प्रोजेक्टों पर काम शुरू हो चुका है। छात्रवृत्तियों पर फैसला सरकार का होता है।
अभिभावक : सरकारी स्कूलों में कई विषयों के शिक्षक नहीं है, हमारे बच्चे कैसे पढ़ेंगे?
शिक्षक : सरकार भर्ती को लेकर कई फैसले ले रही है। जल्दी ही शिक्षकों की भर्ती शुरू हो जाएगी।
अभिभावक : कक्षाओं में बच्चे होते हैं, जबकि सरकारी स्कूल के शिक्षक बाहर सर्वे करते हैं?
शिक्षक : हम भी मजबूर हैं लेकिन इस पर सरकार से हमारी भी बातचीत चल रही है कि शिक्षकों से गैर-शैक्षिक कार्य न करवाए जाएं।
55 फीसदी अभिभावकों के सवाल जायज हैं। हालांकि उन्हें संतुष्ट जवाब दिया जा रहा है। सर्वे में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। - राजसिंह मलिक, जिला प्रधान, हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन
डोर-टू-डोर जाकर शिक्षक अभिभावकों को संतोषजनक जवाब दे रहे हैं, ताकि सरकारी स्कूलों में दाखिले संख्या बढ़ाया जा सकें। सुविधाओं और छात्रवृत्तियों की जानकारी भी दी जा रही है। - धनपत राम, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, हिसार