हिसार। नगर निगम की ओर से प्रस्तावित क्लस्टर स्तरीय कचरा प्रोसेसिंग प्लांट का प्रोजेक्ट एक बार फिर अटक गया है। मेरठ की एजेंसी को टेंडर दिए जाने से नाराज दिल्ली की एजेंसी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर हाईकोर्ट ने वर्क ऑर्डर जारी करने पर रोक लगा दी है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन फिलहाल मेरठ की एजेंसी को वर्क ऑर्डर नहीं दे सकेगा। मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी।
बता दें कि बीड़ में छह एकड़ जमीन पर क्लस्टर स्तरीय कचरा प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है। इसमें हिसार के साथ हांसी, नारनौंद, उकलाना, बरवाला और सिवानी का करीब 290 टन कचरा रोजाना पहुंचाया जाएगा। नगर निगम एजेंसी को प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध करवाएगा, जबकि मशीनरी और अन्य बुनियादी ढांचा एजेंसी को स्थापित करना होगा। प्लांट लगाने पर करीब नौ करोड़ 93 लाख रुपये खर्च होंगे।
तीन एजेंसियों ने किया था आवेदन
नगर निगम ने कचरा प्रोसेसिंग की व्यवस्था संभालने के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। इसमें दिल्ली की एक और मेरठ की दो एजेंसियों ने आवेदन किया था। दिल्ली की एजेंसी ने 386 रुपये प्रति टन की सबसे कम बोली दी थी। इसके बावजूद निकाय मंत्री विपुल गोयल की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में हुई बैठक में दिल्ली की एजेंसी के आवेदन को दरकिनार कर मेरठ की एजेंसी को टेंडर दे दिया गया। इससे नाराज होकर दिल्ली की एजेंसी ने हाईकोर्ट का रुख किया।
ऐसे होना है प्लांट में कचरे का निस्तारण
प्रस्तावित प्लांट में आधुनिक तकनीक से कचरे का वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से वर्गीकरण व निस्तारण किया जाएगा। गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जाएगी, जिसका उपयोग कृषि और बागवानी में हो सकेगा। प्लास्टिक, रिसाइकिल योग्य सामग्री और अन्य गैर-जैविक कचरे को अलग किया जाएगा। प्लास्टिक का इस्तेमाल सीमेंट फैक्ट्रियों, रिसाइकिलिंग उद्योगों और सड़क निर्माण में ईंधन व कच्चे माल के रूप में किया जाएगा।
रोहतक में 385 रुपये प्रति टन की दर से हो रही प्रोसेसिंग
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली की एजेंसी ने 386 रुपये प्रति टन की बोली लगाई थी। वहीं, रोहतक नगर निगम में मेरठ की एजेंसी 385 रुपये प्रति टन की दर से कचरे की प्रोसेसिंग कर रही है। हिसार में भी मेरठ की एजेंसी इसी दर पर काम करने के लिए सहमत हो गई थी।
-
प्रोसेसिंग प्लांट के मामले में हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया है। इस कारण मेरठ की एजेंसी को वर्क ऑर्डर नहीं दिया जा सका है। अब हाईकोर्ट के आगामी आदेशों के बाद ही कोई फैसला हो पाएगा।
- जयवीर डूडी, एक्सईएन, नगर निगम।