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Hisar News: विधानसभा में उठे कारीगर और कारोबारी की आवाज तो जूती कारोबार को लगे पंख

Tue, 11 Mar 2025 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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 हांसी में कपड़े/रैक्सीन की जूतियां बनाते कारीगर।
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हांसी। हांसी में राजस्थानी जीनगर समाज के लोगों की ओर से बनाए जाने वाली कपड़े/रैक्सीन की अनोखी जूतियों की मांग तो देशभर में है लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कारीगर केवल घर खर्च निकाल पा रहे हैं तो कारोबारियों को कढ़ाई मशीनें और माल सप्लाई चेन की कमी खल रही है। कारोबारियों का कहना है कि उनकी आवाज को विधानसभा सत्र में उठाया जाए तो उम्मीद है सरकार संज्ञान लेगी। सरकार कई तरह से उनकी मदद कर सकती है और हांसी में बनाए जाने वाली जूतियां देश के कोने-कोने तक पहुंच सकती हैं।
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पूंजी के अभाव में कारीगर अपना काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं तो कारोबारी इनवेस्ट की गई राशि की अदायगी समय पर करने के लिए माल सस्ते में बेचने पर मजबूर हैं। आपसी प्रतिस्पर्धा में कारोबारी कई बार तो कम दाम में ही जूतियां बेच देते हैं। सप्लाई होने वाले माल पर जीएसटी भी पूरी नहीं मिलती तो कभी आधी से ही सब्र करना पड़ता है।



चुनौतियों के बावजूद जूतियों की भारी मांग

हांसी में जूतियों का कारोबार संघर्ष के बावजूद फलफूल रहा है। माल देश के अलग-अलग राज्यों में जा रहा है, लेकिन कारोबार चुनौतियों में घिरा हुआ है। उदाहरण के लिए रेलवे पर पार्सल बुकिंग की सुविधा पिछले करीब तीन वर्षों से बंद है। लंबी दूरी की ट्रेनों का हांसी में ठहराव नहीं होने के कारण यहां के व्यापारियों को पार्सल बुक करवाने हिसार रेलवे स्टेशन पर जाना पड़ता है। कढ़ाई करने के लिए मशीनें नहीं हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के तहत लोन लेने की प्रक्रिया की जानकारी का अभाव है। आमदनी कम होने की सूरत में कारीगरों के बच्चों को छोटी उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। कारीगरों को जगह के अभाव में घर पर ही जूतियां बनाने का काम करना पड़ रहा है।
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कपड़े/रैक्सीन की जूतियां होने से मिलते हैं मनचाहे डिजाइन

कारोबारियों ने बताया हांसी में चमड़े की जूतियां नहीं बल्कि कपड़े/रैक्सीन की जूतियां बनाई जाती हैं। यही वजह है कि जूतियों के यहां मनचाहे डिजाइन मिल जाते हैं। जबकि चमड़े की जूतियों में डिजाइन सीमित होते हैं और महंगी भी होती हैं। हांसी में महिलाओं के लिए बनाई जाने वाली जूतियों की कीमत भी ज्यादा नहीं है। इन्हें बनाने के लिए कपड़ा सूरत व दिल्ली से आता है, लेकिन हांसी में मशीनें नहीं होने के चलते यह कपड़ा पहले लुधियाना जाता है। हांसी में ही अगर कढ़ाई का काम शुरू हो जाए तो जूतियों की कीमत और कम होगी और इसका फायदा कारीगरों, ग्राहकों से लेकर व्यापारियों को भी होगा।






क्या कहते हैं कारोबारी
कारोबार में कई तरह की समस्याएं है। हम चाहते हैं कि उनका समाधान हो। इसके लिए हम अपनी तरफ से तो प्रयास करते हैं। संगठन हो तो चुनौतियों से लड़ना आसान हो जाता है। हम इसके लिए प्रयासरत हैं। जन प्रतिनिधि हमारी आवाज उठाएं तो मजबूती मिलेगी। - रंजीत सिसोदिया, कारोबारी




सरकार को भी हमारी तरफ ध्यान देना चाहिए। अगर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की योजना से लोन और अन्य सुविधाएं मिल जाए तो राह निकल सकती है। हम चाहते हैं कि हांसी से विधायक हमारी बात सरकार तक पहुंचाए। - ज्ञानीराम, कारोबारी





संगठित व्यापार से कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। हम तो इसके लिए प्रयासरत हैं ही दूसरी तरफ सरकार को भी उन कारोबारियों पर ध्यान देना चाहिए जो उभर रहे हैं। ताकी इससे रोजगार भी बढ़े और शहर का विकास भी हो। हांसी में लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव, फैक्ट्री और अन्य तरह की सुविधाएं जूती व्यापार को पंख लगा सकती हैं। - अनिल चायल, कारोबारी
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