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#विसराः हिसार में फर्जीवाड़ा सामने आया तो हादसे में मृतकों का विसरा भेजा जाने लगा जांच के लिए

Tue, 03 Dec 2019 10:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार
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सांकेतिक तस्वीर
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किसी भी फर्जीवाड़े से बचने के लिए नागरिक अस्पताल द्वारा इसी साल से लगभग सभी मृतकों के शवों का विसरा जांच के लिए भेजा जाने लगा है। इससे पहले केवल जहर प्रभावित या पुलिस व परिजनों की डिमांड पर ही विसरा जांच के लिए भेजा जाता था। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि फर्जी पोस्टमार्टम के मामले में जिला नागरिक अस्पताल का एक चिकित्सक फंसा हुआ है और उसकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है। उस केस के बाद कोई भी चिकित्सक किसी भी मामले में रिस्क नहीं लेेना चाहता है।
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इससे पहले तक नागरिक अस्पताल से चिकित्सकों द्वारा केवल जहर प्रभावित केसों के विसरा जांच के लिए भेजे जाते थे। अगर किसी भी चिकित्सक को पोस्टमार्टम के दौरान किसी तरह का शक हो तो वह उसका विसरा जांच के लिए मधुबन लैब में भेज देता है। उसके बाद वहां से जो रिपोर्ट आती है, उसी से मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाता है। मृतकों का फर्जी पोस्टमार्टम करवाकर बीमा कंपनी से क्लेम के द्वारा रुपये हड़प लेने के मामले सामने आ चुके हैं।

इसी तरह से सातरोड़ निवासी कैंसर पीड़ित कुलदीप की मौत को सड़क हादसे में दिखाकर उसके शव का फर्जी पोस्टमार्टम करवाकर बीमा क्लेम के लाखों रुपये हड़प लिए गए थे। इससे उस मामले में एक चिकित्सक को गिरफ्तार कर लिया था। इसी कारण रोड एक्सीडेंट, जहर प्रभावित, अचानक मौत होने, हर्ट अटैक, फंदा लगाए हुए आदि मृतकों के विसरा जांच के लिए भेजते हैं।
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सबसे ज्यादा रोड एक्सीडेंट के भेजे जाते हैं विसरा
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा सबसे ज्यादा रोड एक्सीडेंट से संबंधित किसी भी शव का विसरा शक के आधार पर जांच के लिए भेजा जाता है। जैसे कि पिछले शुक्रवार को भी चिकित्सक ने दो रोड एक्सीडेंट शवों का विसरा जांच के लिए भेजे। इसके बाद दूूसरे नंबर पर जहर प्रभावित के मामले अधिकांश पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल में आते हैं। चिकित्सकों द्वारा उन सभी के विसरा भी जांच के लिए भेजे जाते हैं।

रोड एक्सीडेंट के सभी पोस्टमार्टम उलझे हुए पाए जाते हैं, जिसके कारण स्वयं के द्वारा निर्णय लेना बहुत मुश्किल होता है। भविष्य में किसी भी प्रकार की पेचीदा स्थिति पैदा न हो और मौत के कारण स्पष्ट हों, इस कारण उन सभी शवों का विसरा जांच के लिए भेज दिया जाता है। अकेले मेरे द्वारा 55 शवों के विसरा जांच के लिए भेजे जा चुके हैं।
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- डॉ. सुरेश कौशिक, नागरिक अस्पताल, हिसार
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