गांव चानौत में पानी के मसले को लेकर धरने पर बैठे लोग।
- फोटो : संवाद
गांव चानौत में पेयजल संकट को लेकर चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। सरकार की ओर से मनाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तरफ से धरना कमेटी को एक बार फिर बैठक का न्योता मिला है। एसपी के माध्यम से पहुंचे इस संदेश के बावजूद कमेटी ने फिलहाल कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई है और साफ किया है कि धरना लगातार जारी रहेगा।
सरकार का प्रस्ताव खारिज, टी-कनेक्शन की मांग पर अड़े ग्रामीण
इससे पहले वीरवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री और धरना कमेटी के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच मुलाकात हुई थी। बैठक में मुख्यमंत्री ने गांव के लिए खरकड़ी हेड से 10 इंच की अलग पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव दिया था।
शुक्रवार को जब इस प्रस्ताव को लेकर धरना स्थल पर ग्रामीणों की महापंचायत हुई, तो सर्वसम्मति से इसे खारिज कर दिया गया। कमेटी सदस्य अनूप चानौत ने दो टूक कहा कि जब तक गांव को भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन से सीधा टी-कनेक्शन नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। अलग से लाइन बिछाने का प्रस्ताव हमें मंजूर नहीं है।
बैरिकेडिंग पर पुलिस और किसानों में तीखी नोकझोंक
आंदोलन उस समय और गरमा गया जब पंजाब, सिरसा और फतेहाबाद से 'पगड़ी संभाल जट्टा' संगठन से जुड़े किसानों का एक बड़ा जत्था चानौत धरने को समर्थन देने पहुंचा। पुलिस ने बरवाला रोड स्थित सिंघवा बस स्टैंड के पास भारी बैरिकेडिंग कर किसानों के काफिले को रोक दिया। रोके जाने से नाराज किसान वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। कुछ युवाओं ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिससे पुलिस अधिकारियों और किसान नेताओं (सतबीर पहलवान, दिलबाग हुड्डा और मनदीप) के बीच तीखी नोकझोंक हुई। किसानों के कड़े रुख को देखते हुए आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा और जत्थे को धरना स्थल पर जाने की अनुमति दे दी गई।
आंदोलन को मजबूत करने के लिए बनीं 3 कमेटियां
धरने को लंबे समय तक संगठित रूप से चलाने के लिए ग्रामीणों ने एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। इसके तहत तीन अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है। इसमें से मुख्य कमेटी 21 सदस्यीय है जो सरकार और प्रशासन से बातचीत करेगी और समन्वय कमेटियां में 11-11 सदस्यों की दो अन्य कमेटियां जो धरना स्थल की व्यवस्था और आगामी रणनीति संभालेंगी।