हिसार। पीरियड चार्ट को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म का सहारा लिया तो लोगों ने ट्रोल करना शुरू कर दिया। चरित्र पर सवाल उठाने शुरू कर दिए, लेकिन हार नहीं मानी। पहले ट्रोल करने वालों को समझाया। समझाने पर भी नहीं माने तो कानून की मदद ली। थोड़ा समय जरूर लगा, लेकिन असामाजिक तत्वों को उनके किए की सजा दिलवाई। यह कहानी है नूंह जिले के गांव टांई की अंजुम इस्लाम की। अंजुम को डॉटर विद सेल्फी फाउंडेशन ने नूंह जिले का ब्रांड एंबेसडर घोषित किया है। अंजुम ने शुक्रवार को गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में सेल्फी विद डॉटर दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की।
अंजुम ने बताया कि वर्ष 2018 में वह सुनील जागलान के संपर्क में आई और उनके डॉटर विद सेल्फी कार्यक्रम से जुड़ी। इसी बीच उसने सोशल मीडिया पर अपने नाम से अकाउंट बनाया। इससे पहले तक परिवार व समाज के डर से उसने फेक नाम से अकाउंट बना रखा था। सोशल मीडिया के माध्यम से उसने फाउंडेशन के पीरियड चार्ट सहित अन्य अभियानों का प्रचार करना शुरू कर दिया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक हों। इस दौरान उसे काफी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ लोग तो उसे ट्रोल भी करने लगे। इस कारण उनके माता-पिता को भी ताने सुनने को मिले। इस बारे में उसने सुनील जागलान को अवगत करवाया।
सुनील जागलान ने उसे ऐसे लोगों से न डरने की सलाह दी और उनसे पहले मिलकर बातचीत करने को कहा। इसके बाद वह उन लोगों से मिले और उनसे ऐसा न करने को कहा। मगर, वे नहीं माने। आखिर में उसने सुनील जागलान के कहने पर उन लोगों के खिलाफ महिला आयोग व पुलिस में शिकायत दे दी। उन लोगों के खिलाफ धारा 509 व 354डी के तहत केस दर्ज हुआ और फिर सजा हुई। इसका असर यह हुआ कि उनके माता-पिता जो कभी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने का विरोध करते थे, आज वह भी उसके अकाउंट पर हैं। इस मामले के बाद उसके गांव में काफी लड़कियों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया जो पहले नहीं करती थीं।
दिव्यांगता नहीं बनी बाधा, राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया नाम
बरेली की रिदम शर्मा को डॉटर विद सेल्फी दिवस पर बेस्ट सेल्फी विद डॉटर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यही नहीं रिदम को कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनाया गया। रिदम ने साइन लैंग्वेज से कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर रिदम की मां पूनम शर्मा ने बताया कि रिदम बचपन से ही बोल व सुन नहीं सकती। इस कारण से उन्हें हमेशा उसकी चिंता लगी रहती थी। बचपन से रिदम को खेलों का शौक था तो उसे कोचिंग दिलवानी शुरू की। आज रिदम खेल के दम पर अपना व उनका काम राष्ट्रीय स्तर पर चमका चुकी है। इसी साल फरवरी माह में इंदौर में दिव्यांगों के लिए हुई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में रिदम ने 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में दो स्वर्ण पदक हासिल किए। रिदम शर्मा के अनुसार वह उत्तर प्रदेश में दिव्यांग लड़कियों के लिए काम करना चाहती है। दिव्यांग लड़कियों की सामाजिक सुरक्षा बहाली के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगी।
डिजिटल तकनीक से जुटाए पैसे, कैंसर से जूझ रहे पिता का करवाया इलाज
अयोध्या की रहने वाली कविता सिंह को कार्यक्रम में बेस्ट सेल्फी विद डॉटर के राष्ट्रीय अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। कविता के मुताबिक वर्ष 2019 में उसके पिता कैंसर से जूझ रहे थे। उस दौरान वह उसके पिता के अस्पताल जाती थी। बोन कैंसर के कारण उनका ब्लड ट्रांसफ्यूजन करवाना पड़ता था। आसानी से खून भी नहीं मिलता था। इसके लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ती थी। इसमें काफी खर्चा आता था। हालांकि पिता की इस बीमारी से पहले स्कूल में पढ़ाती थी। मगर, बीमारी के समय ज्यादा समय उनके साथ बिताना पड़ता था तो नौकरी छोड़नी पड़ी। मगर, उसे डिजिटल प्लेटफार्म को आमदनी का जरिया बनाया और इसके माध्यम से पैसे जुटाए। हालांकि आज उसके पिता इस दुनिया में नहीं हैं। कविता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से सेल्फी विद डॉटर की प्रशंसा की तो वह इस मुहिम के साथ जुड़ी। अब वह सोशल मीडिया के माध्यम से गाली बंद, पीरियड चार्ट जैसे अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रही हूं।