हिसार बालसमंद। पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। इंसान के अंदर जज्बा हो तो वह शिक्षा से तमाम ऊंचाइयों को छूं सकता है। शिक्षा विभाग के ‘उल्लास अभियान’ के तहत रविवार को जिलेभर के 369 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई। इस परीक्षा में 11,754 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया और साक्षरता की ओर अपना पहला कदम बढ़ाया।
विज्ञापन
जिला कॉर्डिनेटर डॉ. जोगेंद्र ने बताया कि उन्होंने कई परीक्षा केंद्रों का दौरा किया और सभी जगह परीक्षाएं शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुईं। इस अभियान का उद्देश्य 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के निरक्षरों को पढ़ना-लिखना सिखाकर उन्हें साक्षर बनाना है। इससे पहले चरण की परीक्षा में 16,125 और दूसरे चरण की बुनियादी परीक्षा में 14,500 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इन दोनों परीक्षाओं का आधिकारिक परिणाम अभी घोषित होना बाकी है। बास खंड में सबसे अधिक लोगों ने इस परीक्षा में पेपर दिया। बास में 2668 लोगों का पंजीकरण किया गया। जिसमे से 2140 लोगों ने साक्षर ज्ञान हासिल कर परीक्षा दी।
82 वर्षीय दानी बोली हैमन तो ईब बेरा लाग्या है पढ़ाई भी जरूरी है
इसी कड़ी में रविवार को राजकीय कन्या उच्च विद्यालय सीसवाला में साक्षरता परीक्षा का आयोजन किया गया। स्कूल शिक्षक सुरेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि सीसवाला से 58 पुरुषों और महिलाओं ने परीक्षा दी। 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला दानी देवी ने कहा कि इस उम्र में परीक्षा देकर बड़ी खुशी हो रही है और हैमन तो ईब बेरा लाग्या है पढ़ाई भी जरूरी है। बुजुर्ग महिला ने सभी से आह्वान भी किया कि वह स्वयं भी पढ़ें और अपने बच्चों को भी पढ़ाने की कोशिश करें। जिससे उनके ऊपर से निरक्षर होने का दाग मिट जाए। जीतपुरा के 80 साल के जयपाल ने बताया कि उम्र के इस पड़ाव में साक्षर होना अपने आप में खुशी की बात है। गांव कोहली की 80 वर्षीय महिला कलावती देवी ने उल्लास परीक्षा देकर शिक्षा के प्रति जागरूकता दिखाई। उन्होंने कहा कि अब उसे को अनपढ़ नहीं कहेगा।
विज्ञापन
सफल परीक्षा के आयोजन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से बुजुर्गों महिलाओ ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। हिसार द्वितीय खंड से 1046 लोगों को परीक्षा के लिए चिह्नित कर पंजीकरण करवाया गया। जिसमे से 779 महिलाओं और पुरुषों ने परीक्षा दी।