नारनौंद । हड़प्पा सभ्यता के लोग करीब 225 फीट लंबे और 40 फीट चौड़े समुद्री जहाजों से व्यापार करते थे। गुजरात के लोथल में उत्खनन के दौरान समुद्री व्यापार और जहाज निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं। डेक्कन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति एवं पुरातत्वविद प्रो. बसंत शिंदे ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी।
शिंदे ने बताया कि हड़प्पा सभ्यता के लोग तकनीकी दक्षता और नवाचार के साथ दूरदराज के क्षेत्रों तक व्यापारिक संपर्क स्थापित करते थे। ओमान, मिस्र, मेसोपोटामिया और संयुक्त अरब अमीरात तक उनके व्यापारिक संबंध थे। वे कच्चे माल का आयात कर उससे विभिन्न उत्पाद तैयार करतेऔर फिरदेश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाते थे। इससे उनकी उत्पादन क्षमता, तकनीकी ज्ञान और संगठित व्यापार व्यवस्था का पता चलता है। बैलगाड़ियों सहित परिवहन के विभिन्न साधनों का उपयोग भी सामान पहुंचाने के लिए किया जाता था।
सामूहिक कल्याण और नगर नियोजन को देते थे महत्व
प्रो. शिंदे ने कहा कि हड़प्पा सभ्यता के लोग अनुसंधान और नवाचार की सोच रखते थे। उनकी जीवनशैली में सामूहिक हित और सामाजिक कल्याण को महत्व दिया जाता था। कई प्राचीन सभ्यताओं में राजाओं के लिए विशाल महलों के निर्माण के प्रमाण भी मिले हैं।सिंधु घाटी सभ्यता में नगर नियोजन और सामुदायिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि हड़प्पा सभ्यता को समझने के लिए उसके भौतिक अवशेषों के साथ सामाजिक व्यवस्था, आर्थिक गतिविधियों और जीवनशैली का अध्ययन भी जरूरी है।