हिसार की एमसी कालोनी मार्केट में दुकान पर राखियां दिखाते हुए संचालिका।
हिसार। भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन शुक्रवार को मनाया जाएगा। करीब 16 साल बाद इस बार ऐसा संयोग बन रहा है जब पर्व पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा समाप्त होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
रक्षाबंधन पर शतभिषा नक्षत्र और सुकर्मा योग का संयोग भी बन रहा है जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ माना जाता है। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 8:33 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:19 बजे तक रहेगी।
उदयातिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। भद्रा की बाधा नहीं होने से बहनें दिनभर सुविधानुसार भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। पर्व को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बहनें राखी, मिठाई और उपहार खरीद रही हैं, वहीं भाई भी बहनों के लिए उपहार पसंद करने में जुटे हैं।
शुभ संयोगों से बढ़ेगी पर्व की विशेषता
देवी भवन के पंडित राजेश के अनुसार शतभिषा नक्षत्र और सुकर्मा योग का संयोग रक्षाबंधन की शुभता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। सुकर्मा योग को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इसमें किए जाने वाले धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। शतभिषा नक्षत्र के कारण भी दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। रक्षाबंधन पर बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करेंगी। इसके बाद कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी। भाई बहन की रक्षा का वचन देते हुए उसे उपहार देंगे। इस अवसर पर परिवारों में विशेष पकवान और मिठाइयां बनाने की परंपरा भी निभाई जाएगी।