डबवाली-सिरसा हाईवे पर गांव साहुवाला प्रथम के पास मंगलवार सुबह कार-कैंटर की टक्कर में कार सवार एक बच्ची और वृद्धा सहित तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में मां-बेटा घायल हो गए।
कार सवार डबवाली से सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में आयोजित मजलिस में शामिल होने जा रहे थे। हादसे के बाद कैंटर चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने कैंटर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
डबवाली के दर्पण सिनेमा के पीछे रहने वाले लक्कड़ मिस्त्री पुरुषोत्तम (40) ने करीब दस दिन पहले मारुति कार ली थी। मंगलवार सुबह करीब 7.30 बजे वह अपनी मां गुरदीप कौर (65), पत्नी मनप्रीत कौर (38), बेटे गुरशरण उर्फ नीशू (16) और बेटी संजोत कौर उर्फ खुशी (6) के साथ कार में डेरा सच्चा सौदा सिरसा के लिए रवाना हुए। कार को वह स्वयं चला रहे थे।
गांव साहुवाला प्रथम के पास एक बस को ओवरटेक करते हुए सामने से आए कैंटर ने कार में सीधी टक्कर मार दी। हादसे में पुरुषोत्तम, गुरदीप कौर और खुशी की मौके पर मौत हो गई जबकि गुरशरण और उसकी मां मनप्रीत कौर बुरी तरह से घायल हो गए। दोनों को सिरसा के सामान्य अस्पताल में ले जाया गया। हादसे में कार के परखच्चे उड़ गए। वहीं चालक कैंटर को घटनास्थल पर ही छोड़कर फरार हो गया।
सूचना पाकर बड़ागुढ़ा पुलिस मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त वाहनों को कब्जे में किया। कैंटर में सब्जी के खाली कैरेट मिले। मामले की जांच कर रहे एएसआई राजकुमार ने बताया कि मृतक के भाई नरोत्तम निवासी डबवाली के बयान पर अज्ञात कैंटर चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 279/304ए/427 के तहत मामला दर्ज किया गया है। हादसे में परिवार के तीन जनों की मौत की खबर जैसे ही डबवाली में पहुंची तो पूर शहर में शोक की लहर दौड़ गई।
हमने तो अपनी खुशी खो दी....
नवप्रगति सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्राचार्या चंद्रकांता भारती ने बताया कि पुरुषोत्तम का बेटा गुरशरण उनके स्कूल में कक्षा बारहवीं में पढ़ता है। जबकि संजोत उर्फ खुशी दूसरी कक्षा में पढ़ती थी। हादसे की सूचना जैसे ही स्कूल में पहुंची तो स्कूल में माहौल गमगीन हो गया।
उन्होंने बताया कि दूसरी में पढ़ने वाली खुशी बेहद प्रतिभावान थी। इसी वर्ष 14 से 16 नवंबर तक स्कूल में प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थी। कविता गायन में उसने पहला स्थान अर्जित किया था। नर्सरी से लेकर द्वितीय कक्षा तक वह प्रथम स्थान पर आ रही थी।
प्राचार्या ने बताया कि सोमवार को खुशी ने अपना अंग्रेजी विषय का अंतिम पेपर दिया था। 25 तक उसकी छुट्टी थी। जब भी खुशी किसी स्कूली कार्यक्रम में हिस्सा लेती तो उसकी मां मनप्रीत कौर हमेशा उसे हौसला देने के लिए मौके पर मौजूद रहती।