हिसार। छह माह बाद ब्लू बर्ड झील में फिर से पानी कम होने से हजारों मछलियां मर गईं हैं। रविवार को झील में बड़ी संख्या में मरी मछलियां पाई गईं। काफी संख्या में मछलियां झील से बाहर भी पड़ी थीं। टेंडर की शर्त में स्पष्ट है कि झील में पानी भरवाने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है।
ठेकेदार सत्यपाल ने बताया कि झील में पानी कम होने के कारण कई जगह से किनारे सुख चुके हैं। जबकि झील के केंद्र में दो से ढाई फुट पानी ही बचा है। इस कारण मछलियां मर रही हैं। इससे पहले 18 जून को भी पानी की कमी के कारण हजारों की तादाद में मछलियांं मर गईं थीं। ठेकेदार बताया, करीब दो माह पहले झील में पानी डलवाया गया था। अब फिर से कम हो गया है।
मोटर वाली बोट बंद, पैडल वाली ही चल रही
झील में पानी कम होने के कारण बोट धंसने का डर रहता है। इसलिए एक मोटर वाली बोट बंद हो चुकी है। कम पानी में लोग पैडल वाली बोट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ब्लू बर्ड झील पर एक नजर
- 16 एकड़ में फैली है झील
- साढ़े पांच से छह फुट गहराई
- झील के बीच बना है टापू
- सिरसा-दिल्ली बाईपास पर हरियाणा टूरिज्म ने ब्लू बर्ड टूरिज्म केंद्र को 1995 में बनाया
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पानी भरवाने की जिम्मेदारी ठेकेदार की
झील में पानी भरवाने की जिम्मेदारी ठेकेदार की ही है। झील से मृत मछलियों को जल्द नहीं निकाला जाएगा तो उनकी दुर्गंध आसपास फैल जाएगी। साथ ही बीमारी फैलने की भी आशंका रहेगी। ठेकेदार को इस संबंध में ताकीद किया जाएगा।
- भीमसेन बेनीवाल, जिला मत्स्य अधिकारी