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बाडो पट्टी टोल पर किसानों व डीएसपी में हुई नोकझोंक, रामायण में वाहन चालकों की सुविधा के लिए एक टोल लाइन को खुला छोड़ा

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लांधड़ी टोल पर किसान सरकार का पुतला फूंककर प्रदर्शन करते हुए। - फोटो : Hisar
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हांसी/ बरवाला/ अग्रोहा/ सिवानी (हिसार)। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रविवार को किसानों ने एमएसपी कानून लागू कराने की मांग को लेकर जिले के सभी टोल प्लाजा पर एक से लेकर चार घंटे तक चक्काजाम रखा। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्र सरकार का पुतला फूंका। बाडो पट्टी टोल पर किसानों व डीएसपी के बीच झड़प हुई। वहीं, रामायण टोल पर किसानों ने वाहन चालकों की सुविधा को देखते हुए एक टोल लाइन को खुला रखा। सुरक्षा को देखते हुए सभी टोल प्लाजा पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
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रामायण टोल पर किसानों ने की नारेबाजी
रामायण टोल प्लाजा पर किसानों ने एक लाइन को छोड़कर सभी लाइनों को 11 बजे से 3 बजे तक बंद रखा। किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष कुलदीप खरड की अध्यक्षता में किसानों ने शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। टोल पर शहीद ऊधम सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। किसान नेताओं ने एमएसपी कानून लागू कराने की मांग को लेकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट एसडीओ संदीप कुमार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान दशरथ मलिक, कैलाश मलिक, मुकेश उमरा और राजू खरड़ आदि मौजूद थे।
चौधरीवास टोल पर किसानों ने सरकार का पुतला फूंका
चौधरीवास टोल प्लाजा के आसपास गांवों के किसानों और मजदूरों ने एकत्र होकर सुबह 11 से लेकर दोपहर तीन बजे तक सांकेतिक धरना दिया व सरकार का पुतला फूंका। किसान नेता सोमबीर चौधरीवास ने बताया कि केंद्र सरकार मजदूरों से किए हुए वादे से पीछे हट रही है। इस मौके पर बलजीत मांजू, दिलबाग हुड्डा, संदीप कुमार, अनिल, वीरेंद्र बागोरिया, विजेंद्र भांभू, प्रवीण पनिहार, अजय नंबरदार, आजाद देवा, राजवीर जांगड़ा, बनवारी नेहरा आदि मौजूद रहे।
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अखिल भारतीय किसान सभा के सदस्यों ने किसान भवन में किसान नेता सुकराम जागलान की अध्यक्षता में बैठक की। इसके बाद किसान भवन से लेकर तोशाम रोड तक केंद्र सरकार के खिलाफ पैदल मार्च निकाला। किसानों ने हिसार-राजगढ़ नेशनल हाईवे पर सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक जाम भी रखा। इस मौके पर बलवान बागडी, दयानंद पूनिया, बिल्लू गोदारा, राजवीर सिंधु, सोनू पिलानिया, कुलदीप सिंह, मास्टर उमराव सिंह, रामचंद्र फौजी, सुभाष कौशिक, जय सिंह सहारण आदि मौजूद रहे।
लांधड़ी-चिकनवास टोल पर प्रधानमंत्री का पुतला फूंका
लांधड़ी-चिकनवास टोल पर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंक कर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान एक घंटे तक टोल बंद किया गया। पुलिस प्रशासन ने रूट परिवर्तित कर वाहनों को अलग रास्ते से निकाला। प्रदर्शन का नेतृत्व पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के राज्य महासचिव संदीप सिवाच, केडी अग्रोहा, राज्य उपप्रधान समुंद्र मलिक, सुरेश दुर्जनपुर, गोपाल नंगथला व प्रदीप मलिक ने किया। इस दौरान शहीद ऊधम सिंह को याद करते हुए उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण भी किया गया। इस दौरान संदीप सिवाच ने कहा कि एमएसपी की गारंटी पर कमेटी बनाने को लेकर मोदी सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है। इस अवसर पर मुन्ना गोदारा, राजीव शर्मा, मनदीप क्नोह, अजय सांखला, आनंद, रामस्वरूप सिवाच कुलेरी, राजवीर, राजेश, प्रताप गोदारा, कृष्णा सिवाच, नीलम जांगड़ा, आशा रानी, मंजू, पूजा आदि मौजूद रही।
बाडो पट्टी टोल पर किसानों व डीएसपी में हुई नोकझोंक
बाडोपट्टी टोल कमेटी के नेतृत्व में क्षेत्र के किसानों ने रविवार सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक बाडो पट्टी टोल पर धरना-प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों की मौके पर मौजूद डीएसपी कप्तान सिंह से कहासुनी हो गई। डीएसपी प्रदर्शनकारियों को रोक रहे थे, तो इस दौरान डीएसपी की किसान नेता राजू भगत, टोल कमेटी प्रधान सरदानंद राजली व अन्य से काफी नोकझोंक हुई। किसानों ने अपना विरोध प्रदर्शन व धरना जारी रखा। धरने की अध्यक्षता महेंद्र सिंह पूनिया और कली राम खेदड़ ने की। शहीद ऊधम सिंह के बलिदान दिवस को मनाते हुए धरनारत किसानों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
किसानों ने वादाखिलाफी के विरोध में केंद्र सरकार के पुतले का दहन किया। मास्टर महेंद्र सिंह पूनिया ने कहा कि पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की है। जब किसान केंद्र सरकार के पुतला दहन की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस की तरफ से अभद्रतापूर्ण रवैया अपनाया गया। किसान नेताओं को धक्के मारे गए, गाली-गलौज की गई। सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा हिसार की मीटिंग करके इस घटना पर ठोस निर्णय लिया जाएगा। इस मौके पर ओमप्रकाश कोहली तलवंडी राणा, बलवान बैनीवाल, नरेश भ्याण सरसोद, राजू भगत सरसोद, ईश्वर बाड्डोपट्टी, ईश्वर ग्रेवाल, दयानंद ढूकिया, चंदगीराम सिहाग, कलीराम खेदड़, सत्येंद्र सहारण, सरदानन्द राजली, अंग्रेजों, बूरो देवी, चंद्रपति बिचपड़ी, खुजानी आदि शामिल रहे।
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